विकास की दौड़ में पिछड़ा बिल्हा का वार्ड नंबर 10 लापता” पार्षद और बदहाल वार्ड: जनसमस्याओं के भंवर में बिल्हा का वार्ड क्रमांक 10
बिल्हा संवाददाता: रूपचंद अग्रवाल
बिल्हा। नगर पंचायत बिल्हा के वार्ड क्रमांक 10 की स्थिति आज ‘चिराग तले अंधेरा’ वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है। एक ओर जहाँ शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि नगर के कायाकल्प का दावा कर रहे हैं, वहीं वार्ड नंबर 10 के नागरिक मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। आलम यह है कि आक्रोशित जनता अब अपने ही निर्वाचित पार्षद को ढूंढने पर मजबूर है।


1. नेतृत्व का अभाव और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना
नगर पंचायत चुनाव के दौरान वार्ड क्रमांक 10 की जनता ने बड़े उत्साह के साथ कांग्रेस की महिला प्रत्याशी को अपना मत देकर विजय बनाया था। उम्मीद थी कि एक महिला प्रतिनिधि होने के नाते वार्ड की समस्याओं का संवेदनशीलता से समाधान होगा। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। पारिवारिक व्यस्तताओं और आर्थिक मजबूरियों के कारण पार्षद महोदया स्वयं एक निजी संस्थान में कार्यरत हैं, जिससे वे वार्ड को समय नहीं दे पा रही हैं। वहीं, पार्षद पति द्वारा जिम्मेदारी संभालने के दावों के बावजूद वार्ड विकास की राह जोह रहा है। जनता आज यह सवाल पूछ रही है कि उनकी समस्याओं की जवाबदेही किसकी है—शासन की, प्रशासन की या उस जनप्रतिनिधि की जिसे उन्होंने अपना प्रतिनिधि चुना था?


2. समस्याओं का अंबार: नारकीय जीवन जीने को मजबूर नागरिक
वार्ड नंबर 10 की दुर्दशा को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है, जो प्रशासन की विफलता की कहानी बयां कर रहे हैं:
सफाई व्यवस्था का जनाजा: महीनों से नालियों की सफाई नहीं हुई है। नालियां कचरे और कीचड़ से लबालब भरी हुई हैं, जिससे क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। विडंबना देखिए कि जब सड़कों की सफाई होती है, तो कचरा सड़कों के किनारे ढेर कर दिया जाता है, जो हवा या बारिश के साथ वापस नालियों में चला जाता है।


खुली नालियां और असुरक्षित मार्ग: वार्ड में कई स्थानों पर नालियां खुली पड़ी हैं। अंधेरे में ये नालियां राहगीरों और मवेशियों के लिए मौत का जाल बनी हुई हैं। आए दिन यहाँ छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
खंडहर बना फवारा चौक: बिल्हा नगर का प्रवेश द्वार ‘फवारा चौक’ कभी अपनी रंगीन लाइटों और फुहारों के लिए आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। आज देखरेख के अभाव में यहाँ की पाइपें और कीमती लाइटें चोरी हो चुकी हैं। जहाँ पूरे शहर के चौक-चौराहों पर हाईमास्ट लाइटें जगमगा रही हैं, वहीं प्रवेश द्वार फवारा चौक अंधेरे के साये में डूबा रहता है।
जर्जर पानी टंकी: गिरती साख का प्रतीक: वार्ड नंबर 10 स्थित पुरानी पानी टंकी, जो कभी पूरे शहर की प्यास बुझाती थी, आज जर्जर होकर गिरने की कगार पर है। किसी भी दिन यह एक बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है, लेकिन प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
खतरनाक मोड़ और बढ़ती दुर्घटनाएं: पानी टंकी मोड़, जनपद बालक प्राथमिक शाला और हटरी बाजार जैसे क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाएं आम हो गई हैं। बार-बार लिखित और मौखिक शिकायतों के बावजूद यहाँ न तो ‘स्पीड ब्रेकर’ (गति अवरोधक) बनाए गए और न ही ट्रैफिक सिग्नल या सोलर लाइट की व्यवस्था की गई।
3. विकास के नाम पर विनाश: पर्यावरण और संपदा को क्षति
पीडब्ल्यूडी (PWD) द्वारा सड़क निर्माण के दौरान संवेदनहीनता की पराकाष्ठा देखी गई। जेसीबी मशीनों के अनियंत्रित उपयोग से सालों पुराने नीम, आंवला और आम के पेड़ों को बेवजह काटा और उखाड़ा गया। इतना ही नहीं, गलत तरीके से की गई खुदाई के कारण सड़कों के भीतर दबी लाइटों की केबल और पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं, जो अब बिजली के झटके या अन्य दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं।
4. भेदभाव का शिकार वार्ड नंबर 10?
बिल्हा नगर के विकास में क्षेत्रीय विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माननीय श्री धरमलाल कौशिक जी एवं क्रेडा अध्यक्ष माननीय श्री भूपेंद्र सवन्नी जी का मार्गदर्शन सराहनीय रहा है। मुख्य नगर पंचायत अधिकारी श्री प्रवीण गहलोत, अध्यक्ष श्रीमती वरुणा वदंना जेडंरे उपाध्यक्ष श्री सतीश शर्मा और पार्षद श्री मोहन डोरिया के नेतृत्व में अन्य वार्डों में साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और मुक्तिधाम का कायाकल्प जैसे कार्य प्रशंसनीय हैं।
लेकिन यक्ष प्रश्न यह है कि विकास की यह गंगा वार्ड नंबर 10 में आकर क्यों रुक जाती है? क्या यहाँ के नागरिक टैक्स नहीं देते? क्या यहाँ के लोगों को बेहतर जीवन जीने का अधिकार नहीं है?
5. हनुमान चालीसा समिति की चेतावनी
वार्ड की दुर्दशा से क्षुब्ध होकर हनुमान चालीसा समिति के सदस्यों ने एक बार फिर शासन-प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। समिति का कहना है कि उन्होंने हमेशा नगर के सकारात्मक कार्यों का अभिनंदन किया है, लेकिन वार्ड 10 की उपेक्षा अब बर्दाश्त से बाहर है। यदि जल्द ही नालियों की सफाई, जर्जर पानी टंकी का निराकरण और फवारा चौक का जीर्णोद्धार नहीं किया गया, तो नागरिक उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
निष्कर्ष:
वार्ड नंबर 10 के नागरिकों की थकी हुई आंखें अब केवल आश्वासनों से नहीं भरेंगी, उन्हें धरातल पर काम चाहिए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस रिपोर्ट के बाद जागता है या वार्ड 10 इसी तरह समस्याओं के दलदल में धंसा रहेगा।
प्रेषक:
हनुमान चालीसा समिति एवं समस्त आक्रोशित नागरिक,
वार्ड नंबर 10, नगर पंचायत बिल्हा।

