
रिपोर्टर — सुरज पुरेना
बिलासपुर न्यूज / उप मुख्यमंत्री ने हाल ही में रतनपुर से पेंड्रा तक के राष्ट्रीय राजमार्ग का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सड़क व नाली व्यवस्था का जायजा लिया। बिलासपुर शहर की कुछ सड़कों व नालियों को संगमरमर पत्थर से सजाया गया है, लेकिन निरीक्षण का फोकस मुख्यतः राष्ट्रीय राजमार्ग और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर रहा।

पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर लोगों ने सवाल उठाए कि सरकार एक ओर “एक पेड़ मां के नाम” “पूरा जंगल बाप के नाम कर दी” जैसी योजना चलाती है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में जंगलों की कटाई कर दिया, कोयला खदानों व कारखानों के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाती है। इससे हरियाली और वन्य जीवन पर संकट बढ़ता जा रहा है।
अगले साल फिर रहीबोन , बेजा कब्जा तोड़ के रहीबोन.
आवास योजनाओं की स्थिति पर भी गंभीर सवाल हैं। गरीबों को आवास देने के दावे के बावजूद हजारों परिवार आज भी दर-दर भटक रहे हैं। बिलासपुर में वाल्मीकि चौक, अपोलो चौक, बंधवा पारा, चाटीडीह सहित कई स्थानों पर अतिक्रमण हटाने के बाद भी विकास कार्य अधूरे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें आवास न देकर जीवन को कठिन बना दिया गया है। अटल आवास में रह रहे कई परिवार बदहाल स्थिति में हैं।

जानकारी के अनुसार लगभग 60,000 आवास स्वीकृत होने के बावजूद पात्र लाभार्थियों को अभी तक आवास पत्र नहीं मिल पाया है। लोग ‘जन दर्शन’ जैसे शिविरों में लंबी कतारों में खड़े होकर फरियाद कर रहे हैं, लेकिन सुशासन तिहार के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

दूसरी ओर बिजली बिलों को लेकर भी नाराजगी है। नागरिकों का कहना है कि स्मार्ट लोगों के बजाय सरकार ने बिजली मीटर को ‘स्मार्ट’ बना दिया है, जिससे बिल अत्यधिक आ रहे हैं। पहले 150-200 रुपये बिल देने वाले अब 3,000 से 5,000 रुपये तक के बिल भरने को मजबूर हैं। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की आर्थिक हालत पर भारी असर पड़ रहा है और जीना मुश्किल हो गया है।
महतारी वंदन योजना की 18वीं किस्त जारी होने के बाद भी कई माता-बहनें इससे वंचित हैं। सरकार ने अब तक इनके लिए कोई विशेष पहल या वैकल्पिक योजना शुरू नहीं की, जिससे लाभ से वंचित महिलाओं की समस्या बरकरार है।