
रिपोर्टर — सुरज पुरेना
Bilaspur news / सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार, देशभर में अदालतों में लंबित छोटे-छोटे आपराधिक एवं दीवानी मामलों जैसे धारा 138, 294, 323, 506 आदि को सुलझाने के लिए 1 जुलाई से 7 अक्टूबर 2025 तक “तारीख़ निराकरण राष्ट्र के लिए – मध्यस्थता अभियान” चलाया जा रहा है। यह 90 दिवसीय राष्ट्रीय पहल राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य अदालतों पर बढ़ते बोझ को कम करना और विवाद समाधान की प्रक्रिया को तेज, किफायती और सौहार्दपूर्ण बनाना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्यस्थता के माध्यम से मामलों का निपटारा न सिर्फ समय और धन की बचत करेगा, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी मजबूत करेगा।

मध्यस्थता अधिनियम के अनुरूप यह पहल जनता की धारणा बदलने और न्याय व्यवस्था में विश्वास बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। जिला और तालुका स्तर पर विधिक सेवा प्राधिकरणों, न्यायाधीशों, मध्यस्थों तथा बार एसोसिएशनों की मदद से विशेष शिविर, जन-जागरूकता और कानूनी सशक्तिकरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक वादी अदालत के बाहर अपने विवाद निपटाने के लिए मध्यस्थता का सहारा लेते हैं, तो उन्हें “कोर्ट-कचहरी के चक्कर” से मुक्ति मिलेगी और न्याय मिलने में लगने वाले लंबे समय से राहत मिलेगी। यह अभियान न्यायपालिका पर दबाव घटाकर वादियों को त्वरित समाधान प्रदान करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।