पत्रकार एकजुटता की महागाथा: 26 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘चौथे स्तंभ’ का शंखनाद!
राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ, छत्तीसगढ़ इकाई के आह्वान पर 26 नवंबर को देश भर के पत्रकार अपने सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं की मांगों को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली कूच की तैयारी में जुट गए हैं। यह आंदोलन लोकतंत्र के सजग प्रहरी माने जाने वाले पत्रकार समुदाय द्वारा अपने हक के लिए छेड़ा गया एक बड़ा संघर्ष है।
लोकतंत्र के रक्षकों की माँग
तिल्दा-नेवरा/रायपुर से जारी इस घोषणा में देशभर के पत्रकारों ने एक स्वर में कहा है: “हम सबने ठाना है, 26 को दिल्ली जाना है… जंतर-मंतर से होगी गर्जना, चौथे स्तंभ का पूरा हो सपना।”

आयोजकों के अनुसार, इस विशाल एकत्रीकरण में विभिन्न राज्यों के पत्रकार, मीडिया कर्मी, स्वतंत्र पत्रकार, और डिजिटल मीडिया प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों को “लोकतंत्र रक्षक” का दर्जा दिलाना है, साथ ही उन्हें संसद और विधानसभा सदस्यों के समान आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।
️ कलम की शक्ति और मुख्य माँगें
पत्रकार इस आंदोलन के माध्यम से अपनी कलम की शक्ति को प्रदर्शित करने के लिए तैयार हैं। उनका नारा है: “ना तोप, ना तलवार… ज़ुल्म मुकाबिल हो तो अख़बार निकालो।” उनका मानना है कि कलम की धार ही व्यवस्था को चलाती है और चौथे स्तंभ के कमजोर होने पर लोकतंत्र भी कमजोर होता है।
आंदोलन की प्रमुख माँगें निम्नलिखित हैं:
- “लोकतंत्र रक्षक” का दर्जा: पत्रकारों को आधिकारिक तौर पर ‘लोकतंत्र रक्षक’ का दर्जा दिया जाए।
- सुविधाओं में रियायत: सांसद-विधायकों की तरह उन्हें दवाई, शिक्षा और यात्रा में रियायत मिलनी चाहिए।
- सम्मान और पहचान: वर्षों से बिना मानदेय (अवैतनिक) सेवा दे रहे पत्रकारों को सम्मान और पहचान सुनिश्चित हो।
- सुरक्षा और स्वतंत्रता: मीडिया कर्मियों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए एक स्पष्ट और मजबूत कानून बनाया जाए।
- त्वरित सहायता तंत्र: प्रदेशों और जिलों में प्रेस से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए सहायता तंत्र लागू हो।
欄 एकजुटता का संदेश
आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या गुट के विरुद्ध नहीं है, बल्कि संपूर्ण मीडिया जगत की सुरक्षा और सम्मान के लिए है। जंतर-मंतर से उठेगी यह एकजुट आवाज़ सरकार तक एक मजबूत संदेश पहुँचाएगी कि “चौथे स्तंभ को सम्मान दो, कलम को आवाज़ दो।” यह राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों के एकजुट होने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।



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