अखिल भारतीय हिंदू परिषद की महिला इकाई ने वृद्धाश्रम में मनाई ‘फूलों की होली’; बुजुर्गों के चेहरों पर बिखरी मुस्कान
[बिलासपुर], [14:03:226]: अखिल भारतीय हिंदू परिषद की महिला पदाधिकारियों ने आज सामाजिक सरोकार की एक अनूठी मिसाल पेश की। संस्था की ओर से स्थानीय वृद्धाश्रम में ‘फूलों की होली’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य उपेक्षित महसूस कर रहे बुजुर्गों के जीवन में खुशियों के रंग भरना और उन्हें इस बात का अहसास कराना था कि समाज उनके साथ खड़ा है।

फूलों की वर्षा और उत्साह का संगम
कार्यक्रम की शुरुआत संस्था की महिला सदस्यों द्वारा आश्रम के सभी वृद्धजनों पर पुष्प वर्षा कर की गई। पारंपरिक गुलाल के बजाय फूलों से खेली गई इस होली ने वातावरण को सुगंधित और खुशनुमा बना दिया। जैसे ही फूलों की पंखुड़ियां हवा में उड़ीं, आश्रम के हर कोने में बुजुर्गों का उत्साह देखते ही बनता था। वर्षों से अकेलेपन का सामना कर रहे कई बुजुर्ग इस स्नेह को देखकर भावुक हो गए।

सम्मान और उपहार वितरण
केवल होली खेलना ही इस आयोजन का हिस्सा नहीं था, बल्कि संस्था ने बुजुर्गों के प्रति अपना सम्मान प्रकट करने के लिए उन्हें नए वस्त्र और अन्य आवश्यक दैनिक उपहार भी वितरित किए। परिषद की पदाधिकारियों ने स्वयं प्रत्येक बुजुर्ग के पास जाकर उनसे आशीर्वाद लिया और उन्हें उपहार भेंट किए। उपहार पाकर बुजुर्गों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने संस्था के सदस्यों को अपना भरपूर आशीष दिया।
गीत-संगीत और नृत्य की धूम
होली का उत्सव बिना गीतों के अधूरा है। इस अवसर पर परिषद की महिलाओं और आश्रम के वासियों ने मिलकर होली के पारंपरिक गीतों पर नृत्य किया। ढोलक की थाप और फाग के गीतों ने माहौल को इतना सजीव बना दिया कि कई बुजुर्ग अपनी उम्र और शारीरिक सीमाओं को भूलकर झूमने लगे। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि खुशियां साझा करने से बढ़ती हैं।

संस्था का संदेश
इस अवसर पर अखिल भारतीय हिंदू परिषद की मुख्य महिला पदाधिकारियों ने कहा:
“आज के व्यस्त समय में हम अक्सर अपने उन बुजुर्गों को भूल जाते हैं जिन्होंने हमें चलना सिखाया। इस कार्यक्रम का एकमात्र उद्देश्य उन्हें यह महसूस कराना था कि वे अकेले नहीं हैं। फूलों की होली मात्र एक उत्सव नहीं, बल्कि उनके प्रति हमारे प्रेम और सम्मान की अभिव्यक्ति है। हम चाहते हैं कि हर त्योहार पर इन बुजुर्गों के चेहरे इसी तरह चमकते रहें।”
उपसंहार
कार्यक्रम के अंत में सभी ने मिलकर जलपान किया और संकल्प लिया कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजन जारी रहेंगे ताकि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक खुशियां पहुंचाई जा सकें। इस आयोजन ने न केवल होली के त्यौहार को सार्थकता दी, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी पुनर्जीवित किया।


