अवैध हॉस्टलों का जाल: नियमों को ताक पर रखकर रिहायशी इलाकों में चल रहे सैंकड़ों पीजी और हॉस्टल
बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में इन दिनों अवैध हॉस्टलों और पेइंग गेस्ट (PG) का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। शहर के रिहायशी इलाकों जैसे कि सरकंडा, कोनी, मंगला, व्यापार विहार और टिकरापारा में बिना किसी वैध लाइसेंस और सुरक्षा मानकों के सैकड़ों हॉस्टल संचालित किए जा रहे हैं। नगर निगम और प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इन अवैध संस्थानों में न तो छात्रों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं और न ही शासन के नियमों का पालन किया जा रहा है।

नियमों की सरेआम धज्जियां
जांच में यह पाया गया है कि अधिकांश हॉस्टल संचालक सामान्य आवासीय मकानों को व्यावसायिक रूप से उपयोग कर रहे हैं। नियमानुसार, किसी भी हॉस्टल के संचालन के लिए नगर निगम से व्यावसायिक अनुज्ञप्ति (Gumastha License), अग्नि शमन विभाग से NOC, और पुलिस विभाग में पंजीकरण अनिवार्य है। हालांकि, बिलासपुर के 80% हॉस्टलों के पास इनमें से कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षा और सुविधाओं का अभाव
अवैध रूप से चल रहे इन हॉस्टलों में छात्रों की जान जोखिम में है:
फायर सेफ्टी का अभाव: संकरी गलियों में स्थित इन मकानों में आग बुझाने के यंत्र (Fire Extinguishers) नहीं हैं।
अत्यधिक भीड़: एक छोटे से कमरे में 3 से 4 छात्रों को रखा जा रहा है, जो नगर निगम के स्पेस मानकों के विरुद्ध है।
अस्वास्थ्यकर भोजन: मेस और कैंटीन में स्वच्छता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जा रहा है, जिससे छात्रों के स्वास्थ्य
पर बुरा असर पड़ रहा है।
सुरक्षा गार्ड और सीसीटीवी की कमी: महिला हॉस्टलों में भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जिससे छात्राओं में असुरक्षा का माहौल है।
राजस्व की चोरी
इन अवैध हॉस्टलों के कारण शासन को लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। रिहायशी दर पर बिजली और पानी का कनेक्शन लेकर इन्हें भारी मुनाफे वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की तरह चलाया जा रहा है। कई मकान मालिकों ने अपने घरों को गुपचुप तरीके से हॉस्टल में तब्दील कर दिया है, जिससे न केवल ट्रैफिक की समस्या बढ़ रही है, बल्कि मोहल्ले की शांति भी भंग हो रही है।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
प्रशासन को चाहिए कि वे अनिवार्य रूप से सभी हॉस्टलों का ‘रजिस्ट्रेशन पोर्टल’ शुरू करें ताकि पारदर्शिता बनी रहे।


