विशेष संवाददाता मोहन मदवानी
बिलासपुर में मानवता और जीव-सेवा की अनूठी मिसाल: श्री रामावतार अग्रवाल ने गौ-सेवा हेतु दान की 2 एकड़ निजी भूमि
बिलासपुर | धर्मधानी बिलासपुर आज एक ऐतिहासिक और पुण्यमयी दान का साक्षी बना है। बिलासपुर संभागीय चेम्बर ऑफ कॉमर्स के संस्थापक सदस्य एवं अग्रवाल समाज के पूर्व अध्यक्ष, आदरणीय श्री रामावतार अग्रवाल जी ने जीव-दया की पराकाष्ठा को छूते हुए, शनिचरी बाजार (हैप्पी स्ट्रीट) स्थित अपनी 2 एकड़ निजी भूमि घायल एवं असहाय गौमाता की सेवा के लिए समर्पित कर दी है। इस महादान ने न केवल शहर बल्कि पूरे प्रदेश में सेवा और समर्पण की एक नई परिभाषा लिखी है।
संघर्ष से संकल्प की सिद्धि तक का सफर
विगत 23 वर्षों से ‘बिलासपुर गौ सेवा धाम’ निरंतर बीमार, दुर्घटनाग्रस्त और निराश्रित गौवंश एवं नंदी बाबा की सेवा में जुटा हुआ है। गौ-सेवा के इस पुनीत कार्य में सबसे बड़ी बाधा स्वयं की भूमि का न होना था। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए संस्था और गौ-भक्तों द्वारा वर्षों से प्रयास किए जा रहे थे। अनेक पदयात्राएं निकाली गईं, शासन-प्रशासन से गुहार लगाई गई और लंबा संघर्ष किया गया। आज श्री रामावतार अग्रवाल जी के इस “अद्भुत महादान” से वह वर्षों पुराना पुण्य संकल्प साकार हो गया है।
“सेवा ही साथ जाएगी” – दानदाता का संदेश

इस अवसर पर श्री रामावतार अग्रवाल जी ने अपनी विनम्रता का परिचय देते हुए कहा कि यह सब ईश्वर की प्रेरणा से संभव हुआ है। उन्होंने समाज को संदेश दिया कि:
“इस नश्वर संसार से कोई कुछ लेकर नहीं जाता; केवल हमारे द्वारा किए गए नेक कर्म और निस्वार्थ सेवा ही परलोक में हमारे साथ जाती है। गौमाता की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।”
गौ-सेवा धाम का नया अध्याय
शनिचरी बाजार जैसे प्राइम लोकेशन पर स्थित इस भूमि पर अब गौ-सेवा धाम का विस्तार होगा। यहाँ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस अस्पताल, गौ-वंश के रहने के लिए उपयुक्त शेड और उनके चारे-पानी की समुचित व्यवस्था की जाएगी। इससे शहर की सड़कों पर घूमने वाले घायल और बेसहारा पशुओं को एक सुरक्षित और स्नेहपूर्ण आश्रय मिल सकेगा।
समाज से सहयोग की अपील
बिलासपुर के प्रबुद्ध नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने श्री अग्रवाल जी के इस निर्णय की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। यह दान हम सभी के लिए एक आह्वान है कि हम भी अपनी सामर्थ्य अनुसार तन, मन और धन से इस सेवा प्रकल्प में अपना योगदान दें। समाज में बढ़ती भौतिकता के बीच यह कदम आध्यात्मिक चेतना और करुणा का संचार करने वाला है।
इस घोषणा के बाद से ही शहर के गौ-भक्तों में हर्ष की लहर है और लोग इसे बिलासपुर के इतिहास का सबसे बड़ा “जीव-सेवा दान” मान रहे हैं।


