घरघोड़ा जनपद का बड़ा पंचायत घोटाला – छोटेगुमड़ा के सचिव गोपाल ठाकुर के इशारों पर चल रही है जनपद की सत्ता? क्या जनपद CEO विनय चौधरी बन गए हैं कठपुतली?…
रायगढ़। जिले के घरघोड़ा जनपद की ग्राम पंचायत छोटेगुमड़ा में विकास कार्यों के नाम पर हुआ फर्जीवाड़ा अब जनपद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। तीन-तीन बार जांच टीम गठित होने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो यह चर्चा जोरों पर है कि क्या छोटेगुमड़ा के सचिव गोपाल ठाकुर ही वास्तव में जनपद CEO की कुर्सी चला रहे हैं?

गोपाल ठाकुर पर आरोप – विकास की राशि लूटने का बना संगठित तंत्र : छोटेगुमड़ा पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि से नाली, बोरिंग और पेयजल जैसी योजनाओं के नाम पर लाखों रुपये निकाले गए, लेकिन जांच रिपोर्टों में एक भी कार्य पूरा नहीं मिला।
जांच टीम कई बार गांव पहुंची, परंतु सरपंच और सचिव की लगातार अनुपस्थिति के कारण आज तक जांच पूरी नहीं हो सकी।इसके बावजूद सचिव गोपाल ठाकुर जनपद कार्यालय में सक्रिय बने हुए हैं, और अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।ग्रामीणों का कहना है कि जनपद CEO विनय चौधरी की मौन सहमति ही गोपाल ठाकुर की सबसे बड़ी ताकत है।
एक ग्रामीण ने बताया –
“छोटेगुमड़ा में सब कुछ सचिव गोपाल ठाकुर के इशारों पर चलता है। फाइलों से लेकर भुगतान तक, सब उन्हीं की मर्जी से होता है। CEO नाम के रह गए हैं, असली नियंत्रण गोपाल ठाकुर के हाथों में है।”
जनपद CEO की चुप्पी बढ़ा रही है संदेह : तीन-तीन बार जांच टीम गठित होने, स्पष्ट अनियमितताएं सामने आने और जांच अधूरी रहने के बाद भी जब कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने जनपद CEO विनय चौधरी की भूमिका पर सीधा सवाल उठाया है।

जनपद पंचायत सदस्य लीलावती गुप्ता ने कहा –
“जब जांच रिपोर्टें साफ़-साफ़ बता रही हैं कि कार्य अधूरे हैं, फिर भी कार्रवाई नहीं हो रही- तो यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संरक्षण का संकेत है। छोटेगुमड़ा के सचिव गोपाल ठाकुर जनपद स्तर पर प्रभावशाली हो चुके हैं।”
उपसरपंच ने भी कहा –
“जब तक सचिव गोपाल ठाकुर पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक घरघोड़ा जनपद में किसी जांच को निष्पक्ष नहीं माना जा सकता।”
ग्रामीणों का सवाल -जांच या सिर्फ दिखावा? : ग्रामीणों का कहना है कि तीन बार जांच टीम गठित हुई, अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन सरपंच-सचिव के गायब रहने से जांच अधूरी रह गई।
“यह प्रशासन की नाकामी नहीं, बल्कि जांच को कमजोर करने की साजिश है। जनपद कार्यालय में फाइलें दबाकर भ्रष्टाचारियों को बचाया जा रहा है।”
जब बात करनी चाही जनपद CEO से – तो फोन तक नहीं उठाया : इस पूरे मामले पर जब हमने जनपद CEO विनय चौधरी से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। उनका इस गंभीर प्रकरण पर मौन रहना और मीडिया से दूरी बनाना, स्वयं में एक बड़ा प्रश्न खड़ा करता है।
क्या जनपद CEO के पास जवाब नहीं है, या वे किसी तथ्य को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं?
ग्रामीणों की मांग – CEO और सचिव दोनों पर हो उच्चस्तरीय जांच : ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि छोटेगुमड़ा पंचायत में हुए फर्जीवाड़े की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जनपद CEO विनय चौधरी व सचिव गोपाल ठाकुर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। तीन बार जांच टीम गठित होने, रिपोर्ट आने और जांच अधूरी रहने के बावजूद कोई परिणाम न निकलना इस बात का प्रमाण है कि जनपद में “फाइल दबाने और दोषियों को बचाने की प्रवृत्ति” जड़ें जमा चुकी है।
छोटेगुमड़ा बना सचिवशाही का प्रतीक, प्रशासन मौन : छोटेगुमड़ा पंचायत का यह मामला अब केवल एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे घरघोड़ा जनपद के भ्रष्ट तंत्र की सच्चाई को उजागर करता है।
जब सचिव CEO से अधिक प्रभावशाली हो जाए, तो समझिए प्रशासनिक व्यवस्था बीमार हो चुकी है।
अब जनता का सवाल सीधा है –
“क्या जनपद CEO विनय चौधरी वास्तव में प्रशासन चला रहे हैं, या छोटेगुमड़ा के सचिव गोपाल ठाकुर उनके पीछे से डोर खींच रहे हैं?”




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