लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन: 42वें दिन मातृशक्ति ने संभाली कमान, भजन-कीर्तन के साथ गूँजा न्याय का संकल्प
बिलासपुर | लिंगियाडीह और आसपास के क्षेत्रों को बचाने के लिए जारी महाधरना आज अपने 42वें दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलन अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित न रहकर एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। आज के धरने की सबसे खास बात चिंगराज चांटीडीह से आई महिलाओं की भारी उपस्थिति रही, जिन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि यह लड़ाई अब आत्मसम्मान और अस्तित्व की है।
महिला समूहों का मिला ऐतिहासिक समर्थन
चिंगराज चांटीडीह से पहुंची महिलाओं ने आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि प्रत्येक महिला समूह इस न्याय की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। महिलाओं ने एकजुट होकर कहा, “चाहे राजनीतिक दल कोई भी हो, जब बात महिलाओं के सम्मान और उनके आशियाने की आएगी, तो हम दलगत राजनीति से ऊपर उठकर साथ खड़े होंगे।” आंदोलन स्थल पर महिलाओं ने भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी शांतिपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई और यह संदेश दिया कि उनकी आस्था और अधिकार दोनों ही अडिग हैं।

प्रमुख वक्ताओं का संबोधन: “पूरा समाज आपके साथ”
आंदोलनकारियों को प्रोत्साहित करने पहुंचे डॉ. रघु और श्याम मूरत कौशिक ने सभा को संबोधित किया। डॉ. रघु ने कहा कि 42 दिनों से जारी यह तपस्या व्यर्थ नहीं जाएगी, शासन-प्रशासन को जनता की जायज मांगों के आगे झुकना ही होगा। वहीं श्याम मूरत कौशिक ने जोर देकर कहा कि लिंगियाडीह के निवासियों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पूरा शहर और समाज उनके साथ खड़ा है।
आंदोलन में जनभागीदारी और उपस्थिति
आज के धरने में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रमुख लोग और सक्रिय कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से:
भोलाराम साहू, परसराम कश्यप, दिनेश घोरे, कमल घोरे, सोनू गोस्वामी, श्रवण मानिकपुरी, अनिकेत कश्यप, बाबा शर्मा, डॉ. अशोक शर्मा, चतुर सिंह यादव, सिद्धार्थ भारती, आदर्श सेवते, लखन कश्यप, दिनेश यादव, रूपेश साहू, रामशरण कश्यप और टीकम सिंह शामिल थे।
वहीं महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। नेतृत्व करने वाली महिलाओं में यशोदा पाटिल, परमिला वध्रुव, अनिता ध्रुव, नंदनी ध्रुव, आरती श्रीवास, मालती यादव, रामबाई माजिपी, शीला सिंह, सीता साहू, संगीता भादव, जयकंवर अहिरवार, अजनी रजक, कल्याणी यादव, मोगरा यादव, बाई चौहान, पिल्ली बाई, मालती मानिकपुरी, अनुपा श्रीवास, जानकी गोड़, कुमारी मानिकपुरी, संतोषी श्रीवास, रामवाई मानिकपुरी, खोरबहारिन यादव, सवित्ती यादव, भरजीना बेगम, नीरा सेन, लीला भोई, आरती सूर्यवंशी, और मथुरी सूर्यवंशी सहित सैकड़ों प्रभावित परिवार उपस्थित रहे।
न्याय मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष
आंदोलनकारियों ने एक स्वर में यह संकल्प दोहराया कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस, लिखित और न्यायपूर्ण निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह धरना अनवरत जारी रहेगा। लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन अब बिलासपुर शहर के जनसमर्थन का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है। लोगों का कहना है कि यह केवल जमीन बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि अपने हक और हकूक की रक्षा का आह्वान है।




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