अव्यवस्था की भेंट चढ़ा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा थोक बाजार ‘व्यापार विहार’, मूलभूत सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ता व्यापार
बिलासपुर [27/02/2026]: छत्तीसगढ़ की आर्थिक रीढ़ और प्रदेश की सबसे बड़ी थोक मंडियों में शुमार ‘व्यापार विहार’ आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कभी करोड़ों के टर्नओवर और हजारों लोगों को रोजगार देने वाला यह व्यापारिक केंद्र आज प्रशासन की अनदेखी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण अपने पतन की ओर अग्रसर है। व्यापारियों का कहना है कि सुव्यवस्थित ट्रांसपोर्ट नगर की अनुपलब्धता और बुनियादी ढांचे की कमी ने व्यापार को ‘औंधे मुंह’ गिरा दिया है।

परिवहन व्यवस्था का संकट सबसे बड़ी बाधा
व्यापार विहार की सबसे प्रमुख समस्या परिवहन की है। एक थोक मंडी के लिए सुचारू परिवहन जीवनरेखा के समान होता है, लेकिन यहाँ स्थिति इसके ठीक विपरीत है। शहर के भीतर भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध और मंडी के पास अपना ‘ ट्रांसपोर्ट नगर’ न होने के कारण माल की लोडिंग-अनलोडिंग में भारी परेशानी हो रही है।
व्यापारियों का कहना है कि:
सड़कों पर बेतरतीब खड़े ट्रक यातायात को बाधित करते हैं, जिससे आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। परिवहन की लागत बढ़ने के कारण थोक भाव प्रभावित हो रहे हैं, जिससे ग्राहक अब अन्य शहरों या ऑनलाइन विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
मंडी के भीतर ट्रकों के मुड़ने और खड़े होने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है।
दम तोड़ता व्यापार: 40% तक की गिरावट
व्यापारिक संगठनों के अनुसार, बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण व्यापार विहार का व्यवसाय पिछले कुछ वर्षों में तेजी से गिरा है। अन्य राज्यों और पड़ोसी जिलों से आने वाले खरीदारों ने अब यहाँ आना कम कर दिया है।
मूलभूत सुविधाओं का अभाव
मंडी परिसर में सिर्फ परिवहन ही नहीं, बल्कि अन्य बुनियादी जरूरतें भी हाशिए पर हैं:
पार्किंग की समस्या: ग्राहकों और व्यापारियों के लिए कोई व्यवस्थित पार्किंग जोन नहीं है।
स्वच्छता और रोशनी: कचरे के ढेर और सड़कों पर बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें अपराधियों को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे रात के समय असुरक्षा का माहौल बना रहता है।
व्यापारियों की मांग
व्यापार विहार के स्थानीय व्यापारियों ने शासन-प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं: व्यापार विहार के समीप एक आधुनिक ‘ट्रांसपोर्ट नगर’ का तत्काल निर्माण किया जाए। भारी वाहनों के लिए अलग कॉरिडोर या सुगम समय सीमा निर्धारित की जाए। मंडी की सड़कों का चौड़ीकरण और ड्रेनेज सिस्टम का स्थायी समाधान हो। पूरे क्षेत्र को सीसीटीवी निगरानी और पर्याप्त पुलिस गश्त के दायरे में लाया जाए।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ के राजस्व में बड़ा योगदान देने वाला व्यापार विहार आज सरकारी उपेक्षा का शिकार है।



