लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन: 105वें दिन भी जारी रहा महिलाओं का संघर्ष; प्रशासन की चुप्पी और धूल के बीच हक की लड़ाई
बिलासपुर के लिंगियाडीह क्षेत्र में अपनी मांगों को लेकर शुरू हुआ ‘लिंगियाडीह बचाओ धरना आंदोलन’ आज अपने 105वें गौरवशाली दिन में प्रवेश कर गया है। साढ़े तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी आंदोलनकारियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं, भीषण गर्मी और धूल भरे माहौल के बीच क्षेत्र की महिलाएं और बुजुर्ग अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए डटे हुए हैं।

प्रशासन की बेरुखी और महिलाओं का संघर्ष
धरना स्थल पर बैठी मातृशक्ति धूल और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना कर रही है, लेकिन शासन और प्रशासन ने इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह चुप्पी लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है। एक तरफ जहां सरकार महिला सशक्तिकरण के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ 100 से अधिक दिनों से सड़क पर बैठी महिलाओं की जायज मांगों को अनसुना किया जा रहा है।
सामाजिक संगठनों का बढ़ता समर्थन
भले ही प्रशासन मौन हो, लेकिन सामाजिक स्तर पर इस आंदोलन को भारी जनसमर्थन मिल रहा है। आज के धरने में अखिल भारतीय हिंदू परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष उत्कर्ष गरेवाल एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी कमल दुसेजा ने विशेष रूप से शिरकत की। उनके साथ सिंधी युवक समिति के सलाहकार एवं अमर शहीद हेमू कलानी संस्कृत मंडल के मुख्य सलाहकार मोहन मदवानी ने भी धरना स्थल पहुंचकर अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।

नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक लोकतांत्रिक देश में अपनी जायज मांगों के लिए माताओं-बहनों को 105 दिनों तक सड़क पर बैठना पड़ रहा है। प्रशासन को तुरंत उनकी सुध लेनी चाहिए, अन्यथा यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।
आंदोलन में प्रमुख नागरिकों की भागीदारी
आज के धरना प्रदर्शन में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से:
श्रीमती यशोदा पाटिल, कुंती तिवारी, डॉ. रघु साहू, साखन दरवे, भोला राम साहू, प्रशांत मिश्रा, श्रवण दास मानिकपुरी, चतुर सिंह यादव, सिद्धार्थ भारती, आदर्श सिद्धार्थ, दिनेश घोरे, डॉ. अशोक शर्मा, रूपेश साहू, ओंकार साहू, गोपी देवांगन, गोलू देवांगन, अग्नू साहू और सलीम मेमन शामिल थे। इन सभी ने स्वर में स्वर मिलाकर प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया।
मातृशक्ति का सैलाब
लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन की सबसे बड़ी शक्ति यहाँ की महिलाएं हैं। आज धरना स्थल पर महिलाओं की भारी उपस्थिति रही, जो यह दर्शाती है कि यह लड़ाई अब केवल एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि अस्मिता और न्याय की लड़ाई बन चुकी है। उपस्थित महिलाओं में:
रामबाई, राधा साहू, रामौतिन, सूरजबाई, कुमारी निषाद, संतोषी यादव, कुंती प्रजापति, चमेली रजक, जानकी गोड, फुल बाई साहू, पिंकी देवांगन, अनिता पाटील, उर्मिला पाटिल, लीला पाटिल, रूपा सरकार, सरस्वती देवांगन, पुष्पा देवांगन, लता देवांगन, राजकुमारी देवांगन, मथुरा सूर्यवंशी, जमुना सूर्यवंशी, सनी अहिरवार, चंद्रमा अहिरवार, जयकुमार अहिरवार, पीहरिया केवट, सोन बाई, कुंडिया केवट, सोनिया केवट, नंदनी ध्रुव, पिंकी बाई चौहान, प्रमिला ध्रुव, रानी देवांगन, साधना यादव, चंद्रकली निषाद, सीता साहू, सुशीला साहू, सुवासिन साहू, कुमारी यादव, अमेरिका श्रीवास, नंद कुमारी देवांगन, अनीता ध्रुव, रूपा देवी, गायत्री देवांगन, सहोदर गोड, सीता केवट, जानकी देवांगन, सोनिया मानिकपुरी, कौशल्या मानिकपुरी, मालती मानिकपुरी, मरजीना बेगम, सरस्वती यादव, वंदना डे, खोलबहरीन यादव, अनूपा श्रीवास, सुशीला श्रीवास, रामबाई मानिकपुरी, दुर्गा श्रीवास, सावित्री यादव, सुखमति मानिकपुरी, मीरा, शिवकुमारी देवांगन, अर्पणा पटेल, हेमलता देवांगन, सरिता राजपूत, मालती यादव और संतोष सहित बड़ी संख्या में अन्य महिलाएं उपस्थित रहीं।
निष्कर्ष और आगामी रणनीति
सर्वदलीय महा-धरना आंदोलन की समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, यह धरना अनवरत जारी रहेगा। धूल और मिट्टी के बीच बैठकर अपनी आवाज बुलंद कर रही इन महिलाओं ने संकल्प लिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगी। आने वाले दिनों में आंदोलन को जिला स्तर पर और व्यापक बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।


