संवाददाता सुरज वाधवानी
सवा लाख पार्थिव शिवलिंग पूजन के अवसर पर 500 धर्मांतरित परिवारों की सनातन धर्म में सम्मानपूर्वक ‘घर वापसी’
भगवान शिव पर अशोभनीय टिप्पणी करने वाले सुन लें — सनातन किसी को छेड़ता नहीं, लेकिन छेड़ने वाले को छोड़ता भी नहीं।”

शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा)माँ शबरी की पावन धरा और प्रभु श्रीराम की तपोभूमि शिवरीनारायण स्थित राम मिलेंगे आश्रम (तेंदुवाधाम) में सावन महोत्सव के अंतर्गत आयोजित ‘सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन’ के दिव्य अवसर पर 500 धर्मांतरित परिवारों की विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सनातन धर्म में सम्मानपूर्वक घर वापसी कराई गई।
यह आयोजन राम मिलेंगे आश्रम, कुमार दिलीप सिंह जूदेव सनातन फाउंडेशन एवं सेवा न्याय उत्थान के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में अखिल भारतीय घर वापसी अभियान प्रमुख एवं छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने पूजा-अर्चना के पश्चात धर्मांतरित परिवारों के पद प्रक्षालन (पांव पखारकर) कर उन्हें सनातन संस्कृति की मूल धारा से पुनः जोड़ा।

प्रमुख वक्तव्य:
- पितृ संकल्प को आगे बढ़ाने का प्रतिज्ञा: श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा— “मेरे पूज्य पिताजी स्व. महाराज कुमार दिलीप सिंह जूदेव जी ने जिस दृढ़ संकल्प, तपस्या और समर्पण के साथ घर वापसी अभियान की शुरुआत की थी, उसे आगे बढ़ाना मेरे जीवन का मुख्य ध्येय है। अपनी जड़ों से दूर हुए परिवारों को सम्मानपूर्वक मूल परंपरा से जोड़ने का यह पुण्य कार्य निरंतर जारी रहेगा।”
- सनातन विरोधी बयानों पर करारा प्रहार: उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा— “भगवान शिव पर अशोभनीय टिप्पणी करने वाले अरुण पन्नालाल जैसे लोग यह समझ लें कि सनातन धर्म किसी को छेड़ता नहीं, लेकिन जब कोई हमारी आस्था और संस्कृति को चुनौती देता है, तो सनातन उसे छोड़ता भी नहीं। अधर्म का परिणाम समय स्वयं तय करता है—जब भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र चलता है, तो बड़े-बड़े अहंकार धराशायी हो जाते हैं।”
- सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संदेश: श्री जूदेव ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, संस्कृति और जीवन दर्शन है। अपनी जड़ों से जुड़ना प्रत्येक व्यक्ति का सांस्कृतिक अधिकार है।



