कलेक्टर और DEO तक पहुंची सारधा हाई स्कूल की शिकायत: तत्काल निलंबन और जांच की मांग,
बिलासपुर के शासकीय सारधा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गंभीर अनियमितताएं: राष्ट्रीय ध्वज के अपमान और वित्तीय भ्रष्टाचार पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की मांग


बिलासपुर (छत्तीसगढ़):जिला मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर दूर स्थित शासकीय सारधा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (बिलासपुर) में प्राचार्य की कथित स्वेच्छाचारिता, राष्ट्रीय ध्वज के अपमान और व्यापक भ्रष्टाचार का मामला गंभीर रूप से तूल पकड़ चुका है। पूर्व शाला विकास समिति पुर्व अध्यक्ष, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने नवपदस्थ जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) तथा कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर वर्तमान प्राचार्य को तत्काल निलंबित कर उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।

राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर प्राचार्य द्वारा ध्वजारोहण के दौरान मर्यादा एवं प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए उल्टा ध्वज फहराने तथा जूते पहनकर ध्वजारोहण करने का गंभीर आरोप है, जो ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ का सीधा उल्लंघन है।


शासकीय संपत्ति का गबन एवं वित्तीय अनियमितता:
विद्यालय परिसर में उपलब्ध शासकीय कबाड़ की बिक्री से प्राप्त राशि का गबन करने तथा शाला प्रबंधन एवं विकास समिति (SMDC) को किसी भी वित्तीय प्रक्रिया या शासकीय कोष के व्यय से पूरी तरह से अलग रखने के गंभीर आरोप हैं।
बाल अधिकारों का हनन एवं जानलेवा लापरवाही:
लाखों रुपये की लागत से स्थापित आरओ (RO) वॉटर फ्रीजर रखरखाव के अभाव में बदहाल पड़ा है। पेयजल हेतु छात्रों से कार्य कराया जाता है एवं बच्चों द्वारा विद्युत मोटर संचालित कराई जाती है। खुले बिजली के तारों और मोटर संचालन से विद्यार्थियों के साथ कभी भी गंभीर अथवा प्राणघातक हादसा हो सकता है।

विद्यालय परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बना रहता है। परिसर के भीतर शराब की खाली बोतलें और डिस्पोजल ग्लास बिखरे पाए गए हैं, जिससे विद्यालय का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह दूषित हो चुका है।
प्रशासनिक उदासीनता एवं जन-आक्रोश: पूर्व में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को लिखित शिकायत देने के बाद भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया। प्रशासनिक शिथिलता के कारण ग्रामीणों एवं अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त है।
प्रशासनिक मांगें एवं चेतावनी:
जांच प्रभावित न हो, इसके लिए वर्तमान प्राचार्य को तत्काल पद से हटाकर शासकीय सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
त्रि-स्तरीय निष्पक्ष जांच: वित्तीय गबन, राष्ट्रीय ध्वज के अपमान और बाल अधिकारों के उल्लंघन पर निष्पक्ष जांच समिति गठित कर 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
(FIR): ध्वज संहिता के उल्लंघन एवं बाल श्रम/लापरवाही के संदर्भ में विधिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाए।



