वन्यप्राणी हमारी धरोहर और पहचान, इनके संरक्षण की जिम्मेदारी हम सभी की – वन मंत्री श्री केदार कश्यप
कांकेर वनमंडल में वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए रेडियो कॉलरिंग, एआई कैमरा एवं रेस्क्यू वाहन की घोषणा
उत्तर बस्तर कांकेर, 08 अक्टूबर 2026/ लाख विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र, माकड़ी कांकेर में आयोजित राज्य स्तरीय वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि वन्यप्राणी हमारी धरोहर और हमारी पहचान हैं। वनों के साथ-साथ वन्यप्राणियों का संरक्षण भी अत्यंत आवश्यक है। हमें प्रकृति और वन्यप्राणियों के साथ सह-अस्तित्व की भावना से रहना होगा। उन्होंने कहा कि वन एवं वन्यप्राणियों को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि राज्य में वन्यप्राणियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में बाघों की संख्या 17 से बढ़कर 35-36 तक पहुंच गई है। देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व गुरुघासीदास-तमोरपिंगला छत्तीसगढ़ में स्थित है। इसी तरह बारनवापारा अभ्यारण्य में ब्लैक बक (काला हिरण) की संख्या लगभग 30 से बढ़कर 250 तक पहुंच गई है। काला हिरण को गोमार्डा अभ्यारण्य में भी शिफ्ट किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में छत्तीसगढ़ में हाथियों की संख्या लगभग 250 थी, जो अब बढ़कर 450 से अधिक हो गई है। राज्य में हाथियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं तथा मानव-हाथी द्वंद्व से संबंधित शिकायतों में भी कमी देखने को मिल रही है।
गौरैया, गिद्ध और कौआ सहित पक्षियों के संरक्षण पर भी जोर
वन मंत्री ने कहा कि वनों को बचाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। हमारे आसपास पाए जाने वाले गौरैया, गिद्ध और कौआ जैसे पक्षी भी धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रहे हैं, इसलिए इनके संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने बीजापुर जिले में गिद्ध संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने बताया कि इन्द्रावती टाइगर सफारी को शीघ्र ही पर्यटकों के लिए खोला जाएगा।
कांकेर जिले में भालुओं के संरक्षण के संबंध में वन मंत्री ने कहा कि भालुओं के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आगामी एक वर्ष के भीतर कांकेर में भालू-मानव संघर्ष की समस्या को काफी हद तक दूर करने का प्रयास किया जाएगा। भालुओं को उनके प्राकृतिक रहवास में संरक्षित करने के साथ ही उनके प्राकृतिक आवास में ही पर्याप्त प्राकृतिक भोजन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि भालुओं की निगरानी एवं सुरक्षा के लिए कांकेर में एआई अलर्ट सिस्टम विकसित किया गया है, जिसमें 140 कैमरे जुड़े हुए हैं। वन मंत्री श्री कश्यप ने कांकेरवासियों से अपील करते हुए कहा कि खाद्य पदार्थों के अपशिष्ट को घरों के बाहर खुले में न फेंकें, क्योंकि इससे भालू आकर्षित होते हैं और मानव-वन्यप्राणी संघर्ष की स्थिति निर्मित हो सकती है।
कांकेर वनमंडल के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं
कार्यक्रम के दौरान वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कांकेर वनमंडल में वन्यप्राणी संरक्षण एवं मानव-वन्यप्राणी संघर्ष की रोकथाम के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने हिंसक वन्यप्राणियों की सटीक लोकेशन ट्रेसिंग के लिए रेडियो कॉलरिंग हेतु 40 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। इसके अलावा एआई कैमरों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी तथा ग्रामीणों को मोबाइल अलर्ट भेजने के लिए एप निर्माण हेतु 20 लाख रुपये स्वीकृत किए जाने की घोषणा की। वन्यप्राणियों के त्वरित एवं सुरक्षित रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए आधुनिक उपकरण तथा एक नया रेस्क्यू वाहन उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई।
वन और वन्यप्राणी एक-दूसरे के पूरक – विधायक श्री आशाराम नेताम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांकेर विधायक श्री आशाराम नेताम ने वन्यप्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वन्यप्राणी और मानव एक-दूसरे के पूरक हैं। पक्षी कीट प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और किसानों के सहयोगी हैं। वर्तमान में गौरैया, गिद्ध और कौआ जैसे पक्षी विलुप्त होने के कगार पर हैं, इसलिए इनके संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वन्यप्राणियों के साथ-साथ वनों को बचाना भी जरूरी है। इसके लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।


जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण नरेटी ने कहा कि कांकेर जिले में भालू, तेंदुआ और अजगर सहित विभिन्न वन्यप्राणी अक्सर दिखाई देते हैं, जो जिले की प्राकृतिक समृद्धि और खूबसूरती को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मध्य भारत में कांकेर जिले में भालुओं की संख्या अधिक होना जिले के लिए गौरव और उपलब्धि की बात है।
कार्यक्रम को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डे तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री ओ.पी. यादव ने भी संबोधित किया। उन्होंने बताया कि कांकेर वन बाहुल्य जिला है और जिले का लगभग 50 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है। यहां भालू एवं तेंदुओं की संख्या भी अधिक है। वन्यप्राणी संरक्षण के लिए वन विभाग के मैदानी अधिकारी लगातार कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम में नगरपालिका अध्यक्ष श्री अरुण कौशिक, कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार तथा वनमंडल अधिकारी श्री शशिगानंदन के. ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य वन संरक्षक कांकेर श्री विवेकानंद झा ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर गोमार्डा वन्य जीव अभ्यारण एवं गुरूघासी दास तमोरपिंगला टाइगर रिजर्व और अचानकमार की जीती जागती कहानी-झुमरी की जुबानी से संबंधित काफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया, साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में श्री महेश जैन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती तारा ठाकुर, जनपद अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा कावड़े, नगर पंचायत उपाध्यक्ष श्री उत्तम यादव, राजा देवनानी सहित जनप्रतिनिधिगण तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।


