च्वाइस सेंटरों के क्यूआर कोड का दुरुपयोग कर 20-25 लाख की ठगी करने वाले अंतरजिला गिरोह के दो आरोपी गिरफ्तार
बिलासपुर:छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में च्वाइस सेंटरों और सीएससी संचालकों के क्यूआर कोड का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर ठगी करने वाले एक शातिर अंतरजिला गिरोह का बिलासपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके कब्जे से 1,02,000/- रुपये नगद, घटना में प्रयुक्त एक बलेनो कार, एक स्कूटी तथा दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

मामले के प्रार्थी देवेंद्र रजक (संचालक, लक्ष्मी च्वाइस सेंटर, बिल्हा मोड़, बिलासपुर) ने थाना हिर्री में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दिनांक 05 अक्टूबर 2026 को एक व्यक्ति बलेनो कार से उनके सेंटर पहुंचा और फोन-पे के माध्यम से ऑनलाइन रकम लेकर उसके एवज में नकद राशि देने की बात कही। सहमति मिलने पर आरोपी ने क्यूआर कोड की फोटो अपने मोबाइल में ली और स्कैन कर 16,000/- रुपये का फर्जी ट्रांजैक्शन कर लिया। इसके बाद जब प्रार्थी के बैंक खाते में अचानक ‘होल्ड’ लग गया, तो बैंक जाकर पता लगाने पर ज्ञात हुआ कि खाता साइबर फ्रॉड के मामले में ब्लॉक कर दिया गया है। व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से प्रार्थी को पता चला कि इस प्रकार की ठगी कई अन्य सेंटरों के साथ भी हुई है।
प्रार्थी की शिकायत पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में बिलासपुर पुलिस और रेंज साइबर सेल की विशेष टीम गठित की गई। इसी दौरान सूचना मिली कि आरोपी हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में फिर से किसी घटना को अंजाम देने की फिराक में घूम रहे हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घेराबंदी कर आरोपी अंकित आहूजा (निवासी कमल विहार, रायपुर) को धर दबोचा। पूछताछ में उसने अपने साथी आशीष केवटवानी (निवासी महावीर नगर, रायपुर) के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम देने का जुर्म कबूल किया।
आरोपियों का यह गिरोह रायपुर से बलेनो कार में सवार होकर निकलता था। अंकित आहूजा विभिन्न च्वाइस सेंटरों पर जाकर वहां का क्यूआर कोड अपने मोबाइल में खींच लेता था। इसके बाद आशीष केवटवानी उस क्यूआर कोड को स्कैन कर साइबर फ्रॉड की अवैध धनराशि ट्रांसफर करता था, और अंकित सेंटर संचालक से उसकी एवज में असली नगदी रकम लेकर फरार हो जाता था। बाद में जब सेंटरों के बैंक खातों में होल्ड लगता, तब संचालकों को ठगी का शिकार होने की जानकारी मिलती थी।
अब तक के खुलासे:
जांच के दौरान बिलासपुर, रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती और दुर्ग सहित कई जिलों के लगभग 45 संचालकों के साथ धोखाधड़ी सामने आई है। इस ठगी की अनुमानित कुल राशि लगभग 20 से 25 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों की तलाश में जुटी हुई है। इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी रेंज साइबर बिलासपुर श्री प्रसाद सिन्हा एवं उनकी टीम की सराहनीय भूमिका रही है।


