स्कूलों में किचन गार्डन से खेती और पोषण के गुर सीख रहे बच्चे, बिलासपुर जिले के 100 स्कूलों में तैयार हुई हरी-भरी बगिया
बिलासपुर। रिपोर्टर अश्वनी यादव। जिले के शासकीय स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ बच्चों को प्रकृति, पोषण और खेती-किसानी से जोड़ने की पहल की जा रही है। स्कूल परिसरों की खाली जमीन पर विकसित किए जा रहे किचन गार्डन बच्चों के लिए व्यावहारिक शिक्षा का माध्यम बन रहे हैं। जिले के अब तक 100 शासकीय स्कूलों में किचन गार्डन विकसित किए जा चुके हैं। वहीं, पर्याप्त भूमि और पानी की सुविधा वाले अन्य स्कूलों में भी इसे तैयार करने का काम जारी है। इस पहल से बच्चों को पौष्टिक आहार का महत्व समझने, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने और खेती-किसानी की बारीकियां सीखने का अवसर मिल रहा है। किचन गार्डन के विकास में शाला प्रबंधन समितियों, पालकों और ग्रामीणों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्कूलों की खाली जमीन अब हरी-भरी बगियाओं में बदल रही है, जहां बच्चे बीज बोने से लेकर पौधों की देखभाल और सब्जियों के उत्पादन तक की प्रक्रिया को करीब से समझ रहे हैं।

किचन गार्डन में स्थानीय मौसम और जलवायु के अनुकूल विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं। इनमें लौकी, बरबटी, ग्वारफली, भिंडी, चेंचभाजी और अमारी भाजी के साथ शीत ऋतु में पालक, मेथी, धनिया, बैंगन और सरसों भाजी शामिल हैं। इन बगियाओं में उत्पादित सब्जियों का उपयोग बच्चों के भोजन में भी किया जा सकेगा, जिससे उन्हें ताजी और पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। शाला प्रबंधन समितियों के साथ पालक और ग्रामीण भूमि तैयार करने, पौधरोपण तथा पौधों की देखभाल में सहयोग कर रहे हैं।


इससे बच्चों में श्रम के प्रति सम्मान, सामूहिक सहभागिता और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है। शासकीय प्राथमिक शाला पदुमपारा, संकुल सलका नवागांव इस पहल का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है। वर्ष 1996 में स्थापित इस स्कूल में वर्ष 2023 से किचन गार्डन संचालित किया जा रहा है। यहां 17 बालक और 15 बालिकाएं दो शिक्षकों के मार्गदर्शन में खेती-किसानी की बारीकियां सीख रहे हैं। स्कूलों में विकसित ये बगियाएं बच्चों के लिए प्रकृति की खुली पाठशाला बन रही हैं, जहां वे किताबों में पढ़ी बातों को व्यवहार में समझ रहे हैं। बीज से पौधा बनने, मौसम के अनुसार फसलों की वृद्धि और नियमित देखभाल की प्रक्रिया से उनका प्रकृति के प्रति जुड़ाव बढ़ रहा है। इस तरह किचन गार्डन की पहल शिक्षा के साथ पोषण, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देते हुए बच्चों को मिट्टी से जुड़ने और श्रम का महत्व समझने का अवसर प्रदान कर रही है।


