संत शिरोमणि कंवरराम साहिब जी के बलिदान दिवस पर सिंधी समाज ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

बिलासपुर। स्थानीय सिंधी कॉलोनी (भक्त कंवरराम नगर) स्थित झूलेलाल मंदिर परिसर में संत शिरोमणि कवरराम साहिब जी के बलिदान दिवस के अवसर पर एक गरिमामय एवं श्रद्धापूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत, पूज्य सिंधी वार्ड पंचायत, संत कंवरराम सेवा समिति, सिंधी युवा समिति तथा सिंधी समाज के पदाधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में संत जी के प्रेरणाप्रद कार्यों और धर्म रक्षा हेतु दी गई उनकी महान शहादत को पुण्य स्मरण किया गया।
रात्रि 10 बजे दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की गई और संत कंवरराम साहिब जी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

इस अवसर पर पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष श्री विनोद मेघानी, संत कंवरराम सेवा समिति के अध्यक्ष इंदराज मोटवानी, झूलेलाल मंगलम सेवा समिति के अध्यक्ष रूपचंद डोडवानी, मोहन मदवानी, सिंधी युवा विंग के पूर्व अध्यक्ष अजय भीमनानी, श्री कमल बजाज सहित समाज के अन्य प्रमुखजनों ने संत कंवरराम जी की त्याग, तपस्या और अलौकिक शक्तियों से जुड़े संस्मरण साझा किए। वक्ताओं ने उनके द्वारा एक मृत बालक को अपनी मधुर लोरी से नवजीवन देने की घटना का स्मरण करते हुए ऐसे सिद्ध संत को कोटि-कोटि प्रणाम किया। उन्होंने भावी पीढ़ी से आह्वान किया कि वे संत कंवरराम जी के जीवन से प्रेरणा लेकर दीन-दुखियों के उत्थान और सेवा कार्य में सदैव तत्पर रहें।
कार्यक्रम में पूज्य भाई साहब अमर रुपानी ने मधुर भजन-कीर्तन कर अरदास की और संत जी के आशीर्वाद से भारत की सुख-समृद्धि एवं विश्व कल्याण की कामना की।
चौक पर संत कंवरराम जी की मूर्ति स्थापना और नामकरण का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान श्री विनोद मेधानी ने घोषणा की कि बिलासपुर के स्थानीय चौक का नामकरण ‘संत कंवरराम साहिब जी’ के नाम पर करने तथा वहां उनकी प्रतिमा स्थापित करने हेतु पूरा सिंधी समाज एकजुट होकर जल्द ही नगर निगम एवं जिला प्रशासन से मुलाकात करेगा। उन्होंने कहा कि चौक का नामकरण और प्रतिमा स्थापना ही संत जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन श्री मोहन मदवानी ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन श्री खुशाल वाधवानी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर सर्वश्री विनोद मेघानी, रूपचंद डोडवानी, मोहन मदवानी, हरीश टेकवानी, गोपाल सिंधवानी, महेश पमनानी, प्रताप गिडवानी, रमेश मेहरचंदानी, रूपचंद डोडवानी, भाई अमर रुपानी, चंदू जयसिंघानी, गोवर्धन मोटवानी, गुरुनामल, वासु पारवानी, राजमल बजाज, हरीश लालचंदानी, द्वारिका गिडवानी सहित सिंधी समाज के अनेक गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहे।




