सांस्कृतिक पुनर्जागरण की ओर महत्वपूर्ण कदम अखिल भारतीय हिंदू परिषद के नेतृत्व में होगा शहर के छोटे मंदिरों का कायाकल्प
छत्तीसगढ़ /[बिलासपुर], [26/11/2025 – अखिल भारतीय हिंदू परिषद (ABHP) ने आज एक ऐतिहासिक और दूरगामी पहल की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य शहर के सांस्कृतिक ताने-बाने को मजबूत करना है। परिषद के प्रदेश महामंत्री श्री उत्कर्ष सिंह के गतिशील नेतृत्व में, यह निर्णय लिया गया है कि शहर के उन तमाम छोटे और प्राचीन मंदिरों का व्यापक जीर्णोद्धार (कायाकल्प) किया जाएगा जो उपेक्षा या सीमित संसाधनों के कारण अपनी चमक खो चुके हैं।
यह घोषणा सिर्फ ईंट-पत्थर को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण (Cultural Renaissance) की एक महाअभियान की शुरुआत है। श्री उत्कर्ष सिंह ने इस पहल को ‘देवभूमि संरक्षण महाअभियान’ नाम दिया है और विश्वास जताया है कि यह न केवल इन पवित्र स्थलों के भौतिक स्वरूप को बदलेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों में आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता की भावना को भी पुष्ट करेगा।

अभियान के मुख्य उद्देश्य एवं निहितार्थ
इस कायाकल्प योजना के पीछे अखिल भारतीय हिंदू परिषद की एक सुचिंतित और व्यापक दृष्टि है, जिसके कई आयाम हैं:
1. धार्मिक धरोहर का संरक्षण:
भारत की आत्मा उसके मंदिरों में बसती है। कई छोटे मंदिर, जो सदियों पुराने हैं, हमारी कला, स्थापत्य और इतिहास का अमूल्य हिस्सा हैं। इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य इन मंदिरों की मूल संरचना और पवित्रता को बनाए रखते हुए उन्हें आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालना है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जीर्णोद्धार का कार्य परंपरा और वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों के अनुरूप हो।
2. सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकास:
वर्तमान में, कई छोटे मंदिर केवल पूजा स्थल बनकर रह गए हैं। ABHP की योजना है कि इन्हें पुनः स्थानीय समुदाय के सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक केंद्र (Socio-Cultural Hubs) के रूप में स्थापित किया जाए। जीर्णोद्धार के बाद इन परिसरों में पुस्तकालयों, सामुदायिक बैठकों के लिए हॉल और योग/ध्यान कक्षाओं के लिए स्थानों का निर्माण या सुधार किया जाएगा। यह कदम इन मंदिरों को स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बना देगा।
3. पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा:
मंदिरों के सौंदर्यकरण से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। जब ये स्थल आकर्षक और सुविधा संपन्न बनेंगे, तो न केवल शहर के लोग, बल्कि बाहर के श्रद्धालु भी इन्हें देखने आएंगे। इससे स्थानीय वेंडरों, पुजारियों और आसपास के छोटे व्यवसायों को आर्थिक मजबूती मिलेगी, जिससे एक आत्मनिर्भर स्थानीय अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा।
4. युवा पीढ़ी को जड़ों से जोड़ना:
श्री उत्कर्ष सिंह का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। सुंदर और सुव्यवस्थित मंदिरों के माध्यम से, युवाओं के लिए विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम (जैसे, कथा, कीर्तन, शास्त्रार्थ) आयोजित किए जाएंगे। यह एक ऐसा वातावरण बनाएगा जहाँ वे गर्व के साथ अपनी विरासत को समझ और अपना सकें।
क्रियान्वयन की रणनीति: एक चरणबद्ध योजना
अभियान को सफल बनाने के लिए एक विस्तृत और चरणबद्ध रणनीति तैयार की गई है:
चरण 1: सर्वेक्षण और प्राथमिकता निर्धारण:
सबसे पहले, शहर के सभी छोटे मंदिरों का एक व्यापक सर्वेक्षण किया जाएगा। उनकी वर्तमान स्थिति, ऐतिहासिक महत्व और जीर्णोद्धार की तात्कालिकता के आधार पर एक प्राथमिकता सूची (Priority List) तैयार की जाएगी।
चरण 2: सामुदायिक भागीदारी और धन संग्रह:
यह एक जन-अभियान होगा। ABHP केवल मार्गदर्शन करेगा, लेकिन इस कार्य में स्थानीय समितियों, भक्तों और दानदाताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। एक पारदर्शी ऑनलाइन चंदा प्रणाली (Transparent Donation System) भी स्थापित की जाएगी ताकि कोई भी स्वेच्छा से योगदान दे सके।
चरण 3: विशेषज्ञ परामर्श और कार्य निष्पादन:
जीर्णोद्धार के लिए वास्तुविदों (Architects), मूर्तिकारों और धार्मिक शास्त्रों के जानकारों की एक टीम का गठन किया गया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मंदिर के मूल स्वरूप और पवित्रता के साथ कोई समझौता न हो। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
चरण 4: निरंतरता और रखरखाव:
कायाकल्प के बाद, प्रत्येक मंदिर के लिए एक स्थायी स्थानीय रखरखाव समिति (Local Maintenance Committee) का गठन किया जाएगा, जिसे ABHP की जिला इकाई द्वारा प्रशिक्षित और समर्थित किया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि जीर्णोद्धार का लाभ लंबे समय तक बना रहे।
प्रदेश महामंत्री श्री उत्कर्ष सिंह का संदेश
इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री श्री उत्कर्ष सिंह ने कहा, “यह हमारी आस्था और संस्कृति के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। छोटे मंदिर हमारी आस्था के केंद्र बिंदु होते हैं, लेकिन अक्सर इन्हें भुला दिया जाता है। हमारा संकल्प है कि हर मंदिर फिर से अपनी दिव्यता और भव्यता प्राप्त करे। यह कायाकल्प सिर्फ निर्माण का काम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक हिस्सा है। मैं शहर के सभी नागरिकों, संगठनों और भक्तों से इस पवित्र कार्य में सहयोग करने का आह्वान करता हूँ।”
अखिल भारतीय हिंदू परिषद का यह ‘देवभूमि संरक्षण महाअभियान’ निःसंदेह एक ऐसा प्रयास है जो न केवल धार्मिक स्थलों को संवारेगा, बल्कि पूरे शहर में एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा, जो भविष्य में एक मजबूत और समरस समाज की नींव रखेगा।



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