सब-इंस्पेक्टर अवधेश सिंह की ‘परफेक्ट’ विवेचना: नशीले इंजेक्शन के तस्कर को कोर्ट ने सुनाई 15 साल की कठोर सजा
बिलासपुर: जब पुलिस की सक्रियता और कानूनी बारीकियों का मेल होता है, तो अपराधियों का बचना नामुमकिन हो जाता है। बिलासपुर के जरहाभाठा इलाके में मौत का सामान (नशीले इंजेक्शन) बेचने वाले एक शातिर अपराधी आकाश कुर्रे का अंत अब जेल की चहारदीवारी में हुआ है। माननीय एनडीपीएस कोर्ट ने उसे 15 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
एक गुप्त सूचना
यह कहानी शुरू होती है 11 अगस्त 2023 को। सिविल लाइन थाने के सब-इंस्पेक्टर अवधेश सिंह को एक इनपुट मिला था। इनपुट छोटा था लेकिन खतरनाक—”मिनी बस्ती का एक लड़का युवाओं की जिंदगी में जहर घोलने की तैयारी में है।” बिना वक्त गंवाए, पुलिस ने जाल बिछाया। जरहाभाठा की तंग गलियों में कबाड़ी दुकान के पास घेराबंदी की गई और 23 वर्षीय आकाश कुर्रे को दबोच लिया गया।

विवेचना की ‘वैज्ञानिक’ ढाल
अक्सर एनडीपीएस के मामलों में अपराधी तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर बच निकलते हैं, लेकिन यहाँ पुलिस ने
‘वैज्ञानिक विवेचना’ का रास्ता चुना।
प्रक्रिया की शुद्धता: जब्ती से लेकर सैंपलिंग तक, एनडीपीएस एक्ट की धारा 21, 22 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया गया।
समयबद्ध चार्जशीट: गिरफ्तारी के मात्र 3 महीने के भीतर (07 नवंबर 2023) ठोस सबूतों के साथ चालान पेश कर दिया गया।
कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक सूर्यकांत शर्मा और विवेचक अवधेश सिंह ने ऐसे साक्ष्य रखे कि आरोपी का बचाव पक्ष टिक नहीं सका।
न्यायालय का कड़ा संदेश
न्यायाधीश श्रीमती किरण त्रिपाठी की अदालत ने इस मामले को समाज के लिए गंभीर खतरा माना। 3 जनवरी 2026 को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि नशे के कारोबारियों के लिए कानून में कोई सहानुभूति नहीं है।
फैसला: 15 साल की कड़ी जेल और 1.5 लाख रुपये का जुर्माना। यह उन सभी के लिए चेतावनी है जो बिलासपुर की हवा में नशे का जहर घोलना चाहते हैं।
वर्दी का सम्मान
इस पूरी कानूनी लड़ाई के असली हीरो रहे सब-इंस्पेक्टर अवधेश सिंह। उनकी पेशेवर कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री रजनेश सिंह (IPS) ने उन्हें पुरस्कृत किया है। यह पुरस्कार सिर्फ एक अधिकारी का सम्मान नहीं, बल्कि बिलासपुर पुलिस की उस कार्यसंस्कृति का प्रमाण है जहाँ ‘क्वालिटी इन्वेस्टिगेशन’ को प्राथमिकता दी जा रही है।

