विशेष संवाददाता कुलदीप सिंह ठाकुर
जिला – बिलासपुर- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात के आदेश पर आवासीय परिसर के सामने हिंरी माइंस क्षेत्र में हेलमेट चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात आरक्षक श्रीकांत मिश्रा हेलमेट नहीं पहनने वाले दोपहिया वाहन चालकों पर चालानी कार्रवाई कर रहे थे।

इसी बीच एक बाइक पर तीन सवार युवक बिना हेलमेट तेज रफ्तार में आते दिखाई दिए। आरक्षक श्रीकांत मिश्रा ने जब उन्हें रुकने का इशारा किया तो बाइक सवारों ने रफ्तार और बढ़ा दी। स्थिति को भांपते हुए आरक्षक ने खुद को बचाने के लिए साइड हटने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद बाइक सवारों ने जानबूझकर तेज गति से वाहन आरक्षक के ऊपर चढ़ा दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े।

घटना के बाद पेट्रोलिंग पार्टी द्वारा घायल आरक्षक को तत्काल निजी अस्पताल प्रभा हॉस्पिटल, सरकंडा में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार आरक्षक के बाएं पैर की हड्डी टूट गई है, जिससे वे चलने-फिरने में असमर्थ हैं। साथ ही उनके मुंह में भी गंभीर चोट आई है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि घटना के कई घंटे बाद तक कोई भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अस्पताल पहुंचकर हालचाल लेने नहीं आया। न ही घायल आरक्षक को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता या प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया गया।

परिजनों और साथी पुलिसकर्मियों में गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि आरक्षक दिन-रात खतरनाक परिस्थितियों में ड्यूटी करते हैं, कानून व्यवस्था बनाए रखने में अपनी जान जोखिम में डालते हैं, लेकिन जब उनके साथ ऐसी गंभीर घटना होती है तो सिस्टम मौन साध लेता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि
👉 क्या दोषी बाइक सवारों की गिरफ्तारी होगी?
👉 क्या घायल आरक्षक को न्याय और सहायता मिलेगी?
👉 या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
पुलिस महकमे की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।





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