एकता से सेवा की नई मिसाल: बिलासपुर के 50 से अधिक संगठनों का ‘महागठबंधन’, अब एक क्लिक पर मिलेगी हर सुविधा
बिलासपुर, 5 अप्रैल 2026 बिलासपुर के सेवाभावी संगठनों ने आज इतिहास रचते हुए समाज सेवा की परिभाषा को एक नया विस्तार दिया है। हैप्पी स्ट्रीट में आयोजित एक भव्य ‘महापंचायत’ में शहर के प्रमुख गैर सरकारी संगठनों (NGOs) ने एकजुट होकर एक शक्तिशाली ‘एनजीओ महागठबंधन’ के निर्माण का संकल्प लिया।*
*कोविड के संघर्ष से जन-सेवा के शिखर तक*
इस समूह की नींव आपदा के समय पड़ी थी। कोविड-19 की विभीषिका के दौरान जब मानवता संकट में थी, तब शहर के विभिन्न संगठनों को एक साथ लाकर इस समूह का गठन किया गया था ताकि जनसामान्य तक त्वरित सहायता पहुँचाई जा सके। वही छोटा सा प्रयास आज वटवृक्ष बन चुका है और *50 से भी अधिक सक्रिय एनजीओ के साथ यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा एनजीओ समूह बन गया है।*

*अब होगा डिजिटल आगाज: ‘वन क्लिक’ सेवा*
अपनी इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, यह समूह अब एक ‘मेगा लॉन्च’ की तैयारी में है। इसके तहत एक विशेष मोबाइल ऐप और साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जिससे बिलासपुर की जनता को शहर की तमाम सामाजिक सेवाओं का लाभ केवल एक क्लिक पर मिल सकेगा।
*बैठक के मुख्य संकल्प:*
* *आम जन हेतु ऐप:* एक ऐसा साझा मंच जहाँ जनता की जरूरत और संस्थाओं की सेवा का मिलन होगा।
* *मजबूत बुनियादी ढांचा:* संगठनों के लिए फंड, जनशक्ति और संसाधनों के प्रबंधन हेतु एक केंद्रीय निकाय की स्थापना।
पारदर्शिता और रिपोर्टिंग:* सभी संस्थाओं के वार्षिक कार्यों का लेखा-जोखा और रिपोर्ट तैयार करना ताकि विश्वसनीयता बनी रहे।
व्यापक प्रचार-प्रसार:* टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से इस सेवा क्रांति को घर-घर पहुँचाना।
सामूहिक विकास:* एकत्रित निधि से साल भर चलने वाले विभिन्न सेवा प्रकल्पों को आर्थिक और रणनीतिक मजबूती प्रदान करना।
आज की इस ऐतिहासिक बैठक में कमल छाबड़ा, चंचल सलूजा, गौरव शुक्ला, नवीन ठाकुर, नीरू बिष्ट, सोनिया साहू, अरुणिमा मिश्रा, प्रतिज्ञा सिंह, नीरज गेमनानी, अभिषेक ठाकुर, विपुल शर्मा, शेख अब्दुल मन्नान, शेख सुल्तान खान, राघव साहू, गोविंद राय, अभय दुबे, रितेश शर्मा, शशि मिश्रा और दीपा यादव सहित कई गणमान्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
यह गठबंधन केवल संगठनों का मिलन नहीं, बल्कि बिलासपुर के सुनहरे और सेवायुक्त भविष्य की ओर बढ़ाया गया एक सशक्त कदम है।
*अकेला व्यक्ति कितना भी सामर्थ्यवान क्यों न हो, वह उस कार्य को सिद्ध नहीं कर सकता जिसे एक संगठित समूह सरलता से कर लेता है। कलयुग का मूल मंत्र है कि एकता और मिलजुलकर रहने में ही विजय और सुरक्षा निहित है। जैसे तिनके अलग-अलग होने पर टूट जाते हैं, परंतु मिलकर एक मजबूत रस्सी बन जाते हैं, वैसे ही आपसी मतभेद भुलाकर एक होने में ही समाज और राष्ट्र का कल्याण है।”*


