प्रदेशभर की 128 सिंधी पंचायतों के प्रतिनिधि हुए एक मंच पर एकजुट
संस्कृति-संरक्षण, युवाओं की भागीदारी और समाज की मजबूती पर रायपुर में हुआ गहन मंथनर
रायपुर। सिंधी समाज के गौरवशाली इतिहास, उसकी अभूतपूर्व एकजुटता और राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय योगदान का साक्षी रायपुर का जोरा स्थित ‘प्रतिष्ठा द बैंक्वेट हॉल’ बना। यहाँ पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी सेंट्रल पंचायत द्वारा आयोजित ‘मुखी संवाद’ (विचार, तर्क एवं सुझाव परिचर्चा) में प्रदेशभर की 128 सिंधी पंचायतों के मुखी और प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्रित हुए।

प्रमुख झलकियाँ एवं मुख्य बिंदु:
- सिंधी समाज स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की मिसाल: राज्यपाल रमेन डेका
- पंचायतें समाज की रीढ़: 128 पंचायतों का एक मंच पर आना अद्भुत संगठनात्मक शक्ति का प्रतीक।
- सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव: युवा पीढ़ी सिंधी भाषा और संस्कृति अपनाए, महिलाएं बनें सामाजिक नेतृत्व की धुरी।
- सामाजिक सुधार का संकल्प: शादियों में फिजूलखर्ची पर रोक, जरूरतमंदों की मदद, बेटे-बेटी में समानता और घर-घर सिंधी बोलने का आह्वान।
विभाजन की पीड़ा के बाद भी मेहनत से बनाई पहचान: राज्यपाल रमेन डेका
“विभाजन की असहनीय पीड़ा झेलने, अपनी संपत्ति और मातृभूमि खोने के बावजूद सिंधी समाज ने कभी हार नहीं मानी। कठिन परिस्थितियों को अवसर में बदलते हुए समाज ने व्यापार, शिक्षा, सेवा और उद्योग में अपनी अलग पहचान बनाई और पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बना।”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने सिंधी समाज को स्वाभिमान, आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता की जीवंत मिसाल बताया। उन्होंने कहा:
राज्यपाल ने 128 पंचायतों की एकजुटता को अनुकरणीय बताते हुए युवाओं को अपनी भाषा-संस्कृति से जुड़ने और महिला विंग के माध्यम से महिलाओं को सामाजिक नेतृत्व में आगे लाने पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने महतारी पूजन कर आयोजन की सफलता के लिए बधाई दी।
“मैं भले ही मिश्रा हूँ, लेकिन खुद को सिंधी समाज का हिस्सा मानता हूँ”: विधायक पुरंदर मिश्रा
कार्यक्रम के विशेष अतिथि रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने अपने संबोधन की शुरुआत “जय झूलेलाल, जय जगन्नाथ और जय छत्तीसगढ़” के जयघोष से की। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज ने उन्हें हमेशा अपार स्नेह और अपनापन दिया है और उनके विधायक बनने में इस समाज का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि विभाजन सिंधी समाज की जमीन तो छीन सकता था, लेकिन उसके संस्कार, पहचान और मेहनत करने का जज्बा कभी नहीं छीन पाया।
भाषा बचेगी तो संस्कृति बचेगी, संस्कृति बचेगी तो समाज बचेगा: महेश दरियानी
पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष महेश दरियानी ने समाज की एकजुटता को सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने आह्वान किया कि:
- समाज आधुनिक तकनीक के साथ कदम मिलाए, पर अपनी भाषा और संस्कृति से कभी न कटे।
- युवाओं को व्यापार के साथ-साथ प्रशासन, न्यायपालिका, सेना, शिक्षा, विज्ञान और राजनीति में आगे लाया जाए।
- शादी-ब्याह में फिजूलखर्ची बंद हो, जरूरतमंद परिवारों की मदद की जाए और बेटे-बेटी में भेदभाव न हो।



