संवाददाता सुरज वाधवानी
ग्राम पंचायत खजूरी में धूमधाम से मनाया गया भोजली पर्व, विसर्जन यात्रा में गूंजे पारंपरिक लोकगीत
चकरभाठा/सकर्रा: ग्राम पंचायत खजूरी में पारंपरिक भोजली उत्सव एवं विसर्जन कार्यक्रम आस्था, उल्लास और सामाजिक एकजुटता के साथ संपन्न हुआ। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और कृषि परंपरा को दर्शाते इस आयोजन में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
प्रमुख आकर्षण और गतिविधियां

- पारंपरिक विसर्जन यात्रा: पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं और बालिकाओं ने सिर पर भोजली धारण कर गांव में शोभायात्रा निकाली। पूरे मार्ग में गूंजते पारंपरिक भोजली गीतों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।
- सद्भाव और बधाई संदेश: विसर्जन स्थल पर विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भोजली का विसर्जन किया गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को भोजली भेंटकर आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संकल्प लिया।
- संस्कृति का हस्तांतरण: बुजुर्ग महिलाओं ने नई पीढ़ी को पर्व की लोकपरंपराओं और रीति-रिवाजों की जानकारी दी, वहीं बच्चों व युवाओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
जनप्रतिनिधियों का संदेश
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत सभापति, खजूरी सरपंच श्रीमती राधा अविनाश वर्मा तथा पंच श्री घनश्याम ध्रुव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। अतिथियों ने भोजली की पूजा कर क्षेत्र की खुशहाली और अच्छी फसल की कामना की। उन्होंने कहा कि भोजली पर्व प्रकृति और कृषि से जुड़ा है, जो आधुनिक दौर में युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने का काम करता है।














