दूसरी शादी साबित करने की कानूनी जटिलताओं पर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग सख्त, कानून में संशोधन की सिफारिश करेगा
बिलासपुर। पहली पत्नी के रहते पति द्वारा दूसरी शादी करने या किसी अन्य महिला को पत्नी बनाकर रखने के मामलों में कानूनी साक्ष्य जुटाने की गंभीर व्यावहारिक समस्या को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग अब प्रदेशभर में ऐसे प्रकरणों की केस स्टडी तैयार कर कानून में आवश्यक बदलाव और प्रक्रियाओं को सुलभ बनाने के लिए राज्य सरकार को सिफारिश भेजेगा।

यह बात छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) डॉ. ममता साहू ने बिलासपुर प्रेस क्लब के ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में मीडिया से संवाद के दौरान कही। उन्होंने बताया कि कई मामलों में पति द्वारा दूसरी शादी करने के बाद संबंधित महिला स्वयं को पत्नी मानने से इनकार कर देती है (जैसे खुद को नौकरानी बताना), जिससे पहली पत्नी के लिए अदालत में विवाह को प्रमाणित करना और दस्तावेज या गवाह जुटाना बेहद कठिन हो जाता है। साक्ष्य के अभाव में पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है।
प्रदेशव्यापी केस स्टडी और विशेषज्ञों से परामर्श
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए महिला आयोग छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से सामने आए ऐसे मामलों का अध्ययन करेगा। आयोग यह देखेगा कि एफआईआर, पुलिस जांच और अदालती प्रक्रिया के दौरान महिलाओं को किन-किन व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद विधि विशेषज्ञों, हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं, पुलिस अधिकारियों, न्यायिक क्षेत्र के दिग्गजों, महिला एवं बाल विकास विभाग, सामाजिक संगठनों और मीडिया से सुझाव लिए जाएंगे। व्यापक मंथन के बाद सरकार को कानून में आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
पुलिस के साथ धाराओं की समीक्षा और विशेष प्रशिक्षण
डॉ. ममता साहू ने बताया कि महिलाओं से जुड़े मामलों में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं (विशेषकर धारा 64 और 69) के व्यावहारिक प्रयोग को लेकर जल्द ही पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की जाएगी। इसके अतिरिक्त, त्वरित और प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, न्यायपालिका, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा एनजीओ के लिए रायपुर, अंबिकापुर सहित विभिन्न स्थानों पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
संस्थागत और स्थायी समाधान पर जोर
आयोग अध्यक्ष ने बताया कि पदभार संभालने के पिछले ढाई-तीन महीनों में आयोग ने लगातार जिलों का दौरा कर जनसुनवाई की है, जहां एक-एक दिन में 30 से 35 जटिल मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल सुनवाई और केस के निपटारे तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि कानूनी व संस्थागत स्तर पर महिलाओं को सुरक्षा और स्थायी न्याय दिलाना है।



