
रिपोर्टर — सुरज पुरेना
बिलासपुर न्यूज / छत्तीसगढ़ के नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने हसदेव वन क्षेत्र में प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के लिए दी गई वन अनुमति को तत्काल निरस्त करने की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि यह क्षेत्र सैकड़ों वर्ष पुराने साल वृक्षों, घने जंगलों और समृद्ध जैव विविधता का घर है, जहाँ हाथियों समेत हजारों वन्य जीव प्रजातियां निवास करती हैं। यह वन प्रदेश की पारिस्थितिकी संतुलन और जलवायु स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वन क्षेत्र से सटा ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व का स्थल सीता बंगरा भी है, जहाँ मान्यता के अनुसार प्रभु श्रीराम ने वनवास के दौरान कुछ समय बिताया था। यह स्थल साहित्यकार मोहन राकेश की प्रसिद्ध कृति आषाढ़ का एक दिन की प्रेरणा भी रहा है।

जनता का आरोप है कि कोल ब्लॉक के लिए लाखों पेड़ों की कटाई से हसदेव और अहिरन नदियों का जलग्रहण क्षेत्र प्रभावित होगा। इसका असर बांगो डैम जैसे महत्वपूर्ण जलस्रोत पर पड़ेगा, जिससे न केवल मौजूदा सिंचाई और जल आपूर्ति पर खतरा आएगा, बल्कि भविष्य में बिलासपुर सहित कई शहरों के लिए प्रस्तावित पेयजल परियोजना भी संकट में पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर वनों की कटाई से मानसूनी हवाओं का प्राकृतिक चक्र बिगड़ेगा, जिससे बादल फटने, बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ जाएगा। हिमालय और अन्य क्षेत्रों में पर्यावरणीय विनाश के बाद हुई तबाही इसके उदाहरण हैं।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से कहा है कि हसदेव क्षेत्र केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया के लिए पर्यावरणीय दृष्टि से अति संवेदनशील है। अनुमति वापस लेने से लाखों पेड़ों की कटाई रुक जाएगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, पर्याप्त जल और स्थिर जलवायु सुनिश्चित हो सकेगी।
प्रदेशवासी उम्मीद कर रहे हैं कि शासन उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की वन अनुमति को तत्काल वापस लेगा, ताकि हसदेव का हराभरा जंगल और इसकी जैव विविधता हमेशा के लिए सुरक्षित रह सके।