( रिपोर्टर — सुरज पुरेना )
बिलासपुर न्यूज / निजी बैंकिंग और लोन-फाइनेंस कंपनियों की मनमानी और लापरवाही का एक नया मामला सामने आया है। कोनी आईटीआई निवासी और जिला अस्पताल के पूर्व कर्मचारी दीपक डोंगरे ने एलएनटी फाइनेंस सर्विस और आईडीएफसी प्राइवेट बैंक पर बीमा की राशि न देने का गंभीर आरोप लगाया है।
दीपक ने बताया कि उनकी कॉलोनी में बीमा कंपनी के एजेंट समूह में आकर लोन और बीमा का प्रस्ताव लेकर आए थे। इसके तहत उन्होंने रतनपुर स्थित आईडीएफसी बैंक में 2610 रुपये और सकरी के एलएनटी सर्विस में 2550 रुपये हर माह जमा कराना शुरू किया। कंपनी की शर्तों के अनुसार, बीमा धारक या उनके परिवार के सदस्य के चार दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने या मृत्यु की स्थिति में क्लेम राशि दी जानी थी।

लेकिन दीपक का कहना है कि उनकी बेटी सिकलिंग की बीमारी से पीड़ित रही और चार दिन तक अस्पताल में भर्ती रही। इसके बावजूद कई बार कंपनी के एजेंट और दफ्तर का चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें बीमा का पैसा नहीं दिया गया। मजबूरन उन्हें इलाज के लिए कर्ज लेकर दवाइयों का बिल चुकाना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंट केवल प्रीमियम लेने तक ही सीमित रहते हैं, लेकिन क्लेम की स्थिति आने पर न तो जवाब देते हैं और न ही फोन रिसीव करते हैं। एलएनटी सर्विस के एजेंट चंचल वैष्णव से उनके मोबाइल नंबर 8349667336 पर 2-3 बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
पीड़ित ने प्रशासन और वित्तीय नियामक संस्थाओं से इस मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।



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