विशेष संवाददाता मोहन मदवानी
आदिवासियों की बेदखली और जल-जंगल के विनाश पर जे.पी. देवांगन ने उठाए गंभीर सवाल
बिलासपुर | बिलासपुर प्रेस ट्रस्ट भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता जे.पी. देवांगन ने वन अधिकार, आदिवासी बेदखली, हसदेव अरण्य संरक्षण और तालाबों पर अवैध अतिक्रमण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार और प्रशासन को घेरा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी कर आदिवासियों को उनके जल-जंगल-जमीन से दूर किया जा रहा है।

प्रमुख मांगें और उठाए गए बिंदु:
वन अधिकार मान्यता पत्र की मांग:
वन अधिकार अधिनियम 2006 और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए देवांगन ने मांग की कि बिलासपुर के कोटा (तेंदुआ वन कक्ष क्र. 130), पाली ब्लॉक के बर्धैया, रानीगांव और कोरबा के कारीशापर में तीन पीढ़ियों से रह रहे आदिवासियों के दावों का तत्काल सत्यापन कर उन्हें पट्टा दिया जाए।
बेदखली पर तत्काल रोक:
उन्होंने कहा कि जब तक दावों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और दावे विधिवत खारिज नहीं होते, तब तक किसी भी आदिवासी परिवार को बेदखल न किया जाए। पात्र हितग्राहियों को आधार, राशन कार्ड, जुर्माना रसीद और बुजुर्गों के कथन जैसे दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

आवास जलाने वालों पर कार्रवाई:
प्रेस वार्ता में आरोप लगाया गया कि 13 सितंबर और 6 नवंबर 2024 को आदिवासियों की झोपड़ियां तोड़ी गईं और 36 परिवारों के आवास जला दिए गए। उन्होंने इस कृत्य के लिए वन विकास निगम के अधिकारियों पर SC/ST एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की।
तालाबों से अतिक्रमण हटाने की अपील:
NGT के आदेशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के 22 तालाबों (विशेषकर बलौदा नगर पंचायत के 14 तालाब) से अतिक्रमण हटाया जाना है। नगर पंचायत द्वारा तालाब की जमीन पर कॉम्प्लेक्स बनाकर किराए पर देना एक गंभीर अनियमितता है।
कानून का पालन करते हुए आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।” — जे.पी. देवांगन
हसदेव अरण्य पर चिंता
देवांगन ने हसदेव अरण्य में कोयला खनन के लिए हो रही अंधाधुंध जंगल कटाई पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि यह नहीं रुका, तो स्थानीय खेती, जल स्रोत और आजीविका पूरी तरह नष्ट हो जाएगी।


