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सुरज वाधवानी की खास खबर
चकरभाठा: जय झूलेलाल आश्रम में 50 वर्षों से जारी है सेवा की अनूठी परंपरा; बहराणा साहिब और प्रसाद वितरण संपन्न
चकरभाठा (बिलासपुर):आस्था, अटूट श्रद्धा और जनसेवा के जीवंत केंद्र जय झूलेलाल आश्रम (बाबा हरदास राम साहिब मार्केट) में इस वर्ष भी भक्ति का अनूठा उल्लास देखने को मिला। रामचंद आजाद के कुशल संचालन में इस आश्रम ने सेवा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विगत 50 वर्षों से यहाँ निरंतर श्रद्धापूर्वक बहराणा साहिब का आयोजन और श्रद्धालुओं के बीच डोडा-चटनी एवं शरबत का वितरण किया जा रहा है, जो आज भी उसी उत्साह के साथ जारी है।


धार्मिक अनुष्ठानों से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ संत साईं श्री लाल दास जी के सानिध्य में हुआ। भक्तिमय वातावरण के बीच संत जी द्वारा सर्वप्रथम आरती उतारी गई, जिसके पश्चात पल्लव (अरदास) की रस्म अदा की गई। भगवान के भोग लगने के उपरांत उपस्थित जनसमूह में प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आरंभ हुआ।
सामाजिक एकता की मिसाल
यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्ता रखता है, बल्कि चकरभाठा के नगर वासियों के भरपूर सहयोग के कारण सामाजिक एकता की मिसाल बन चुका है। कार्यक्रम में सिंधी समाज के प्रमुख पदाधिकारियों और प्रबुद्धजनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई,


जिनमें मुख्य रूप से: सुरेश फ़ोटनी (अध्यक्ष, सिंधी पंचायत)
मनोहर मालघनी (अध्यक्ष, पूज्य रियासती पंचायत)श्री परसराम बत्रा प्रकाश जैसवानी, कन्हैया मोटवानी, राजेश नवलानी, मोहन कुकरेजा एवं दीपक नवलानी विशेष रूप से सम्मिलित हुए।
सेवादारों का समर्पण
50 वर्षों की इस अनवरत यात्रा को सफल बनाने में आश्रम की सेवा समिति का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम को सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में निहाल हिरवानी, मुकेश हिरवानी, रमेश जैसवानी, राम पंजवानी, सच्चानंद पंजवानी और बाबू हिरवानी ने दिन-रात अपनी सेवाएँ दीं।

साथ ही मनोज जैसवानी, संजय पंजवानी, गुलशन जैसवानी, अनिल मलघानी, अमर वाधवानी, धनु साहू, भारत बजाज, राजकुमार पंजवानी, टेकचंद, यश और पीयूष वाधवानी के विशेष श्रम और समर्पण की सराहना की गई।
डोडा-चटनी का विशेष प्रसाद
आश्रम की यह परंपरा विशेष रूप से अपने पारंपरिक स्वाद के लिए जानी जाती है। डोडा-चटनी और ठंडे शरबत के वितरण में नगर के हर वर्ग ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। संचालक स्व.रामचंद आजाद के सेवा समिति नेबताया कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इष्टदेव झूलेलाल साईं के प्रति हमारी कृतज्ञता है, जिसे आने वाली पीढ़ी (यश और पीयूष जैसे युवा) भी उत्साह से आगे बढ़ा रही है।


