साइबर पर संवाद” : साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थाओं का साझा संकल्प
बिलासपुर पुलिस द्वारा आयोजित विशेष अंतर-विभागीय साइबर जागरूकता एवं समन्वय कार्यक्रम
जिला बिलासपुर (छ.ग.)साइबर अपराध के बढ़ते खतरे, बैंकिंग प्रणाली के दुरुपयोग तथा साइबर ठगी की बदलती कार्यप्रणाली को समझने एवं उससे निपटने हेतु आज बिलासपुर पुलिस द्वारा “साइबर पर संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना, सामूहिक समझ विकसित करना तथा बैंक अधिकारियों को यह अवगत कराना था कि साइबर ठगी की राशि वास्तव में किन माध्यमों से निकाली जाती है और अपराधी किस प्रकार बैंकिंग तंत्र का दुरुपयोग करते हैं।

कार्यक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), आयकर विभाग, विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ प्रबंधक एवं अधिकारी, साइबर सेल तथा साइबर रेंज पुलिस स्टेशन के अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ साइबर रेंज पुलिस स्टेशन के नोडल अधिकारी श्री गगन कुमार, भा.पु.से. द्वारा प्रस्तुत विस्तृत PPT से हुआ। उन्होंने देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अब तक लगभग 28 लाख लोग साइबर ठगी का शिकार होकर 23,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि गंवा चुके हैं।

उन्होंने वास्तविक केस स्टडी के माध्यम से बताया कि कई मामलों में बैंक के अंदर कार्यरत व्यक्तियों द्वारा अपराधियों को सहायता प्रदान की जाती है, जैसे –
- फर्जी एवं म्यूल अकाउंट खुलवाना,
- KYC नियमों को दरकिनार करना,
- पुलिस द्वारा खाते फ्रीज करने से पहले अपराधियों को राशि निकालने की सूचना देना,
- संगठित साइबर अपराध नेटवर्क को संचालन में मदद करना।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी अपराध नहीं रह गया है, बल्कि यह संगठित आर्थिक अपराध का रूप ले चुका है, जिसमें बैंकिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं फर्जी दस्तावेजों का बड़े स्तर पर दुरुपयोग किया जा रहा है।

इसके पश्चात् वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर श्री रजनेश सिंह, भा.पु.से. ने बैंक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में वरिष्ठ नागरिक साइबर अपराधियों का सबसे आसान लक्ष्य बन रहे हैं। उन्होंने बैंक अधिकारियों से अपेक्षा की कि यदि कोई वरिष्ठ नागरिक बड़ी राशि निकालने आता है तो बैंक कर्मचारी संवेदनशीलता के साथ यह अवश्य पूछें कि कहीं वह किसी “डिजिटल अरेस्ट”, निवेश धोखाधड़ी या साइबर ठगी का शिकार तो नहीं हो रहा।

उन्होंने यह गंभीर मुद्दा भी उठाया कि कई बार साइबर पोर्टल द्वारा खातों पर lien/hold लगाए जाने के बावजूद खातों से राशि डेबिट होती रहती है, जिससे पीड़ितों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बैंक स्वयं भले कार्रवाई न कर सकें, परंतु किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन अथवा असामान्य निकासी की सूचना पुलिस को देकर अपराध रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक श्री राम गोपाल गर्ग, भा.पु.से. ने बैंकों से अपेक्षा व्यक्त की कि करंट अकाउंट खोलते समय केवल दस्तावेजी औपचारिकता तक सीमित न रहें, बल्कि “Enhanced Due Diligence” अपनाई जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि –
- फर्म का भौतिक सत्यापन किया जाए,
- स्टॉक एवं व्यवसायिक गतिविधियों की फोटोग्राफी की जाए,
- प्रारंभिक 15 दिनों तक ट्रांजेक्शन लिमिट रखी जाए,
- पुनः KYC एवं निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि फर्म वास्तव में संचालित हो रही है या नहीं।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी ऐसे खातों का उपयोग केवल ठगी की राशि प्राप्त करने एवं तुरंत ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि genuine खाताधारकों के खातों को शीघ्र डी-फ्रीज करने हेतु प्रक्रिया को सरल एवं व्यवस्थित बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने हरियाणा पुलिस एवं HDFC बैंक द्वारा लागू Dual OTP Authentication System का उल्लेख करते हुए बताया कि वरिष्ठ नागरिकों को साइबर ठगी से बचाने हेतु यह एक अभिनव पहल है।
कार्यक्रम में यह भी चर्चा की गई कि कई ऐसे बचत खाते जो वर्षों से निष्क्रिय थे, अचानक भारी मात्रा एवं तीव्र गति से ट्रांजेक्शन करने लगते हैं, जो म्यूल अकाउंट का संकेत हो सकता है।
RBI के महाप्रबंधक श्री मनीष पराशर ने साइबर अपराध और बैंकों की जिम्मेदारियों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने जोखिम वर्गीकरण (Risk Categorisation), STR (Suspicious Transaction Report) की केंद्रीकृत प्रणाली, बैंकों की सीमाओं तथा वर्तमान तंत्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने RBI की विशेष पहल “Mule Hunter.AI” का उल्लेख किया, जो Artificial Intelligence एवं Machine Learning आधारित प्रणाली है और निर्धारित पैटर्न के आधार पर संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान करने में सहायता करती है।
आयकर विभाग से उपस्थित श्री चंद्रशेखर मेहरा, IRS (2020 बैच) ने शेल कंपनियों की कार्यप्रणाली, STR निर्माण, टैक्स अधिकारियों के नाम पर होने वाली साइबर ठगी तथा किसी व्यक्ति अथवा संस्था के नाम पर पंजीकृत कंपनियों का पता लगाने की प्रक्रियाओं पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में सुश्री अंशिका जैन, आईपीएस, RBI से DGM श्री प्रदीप गोंधुले, आयकर विभाग से ADIT श्री रंजन, विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, साइबर सेल एवं साइबर रेंज पुलिस स्टेशन के अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन साइबर अपराध के विरुद्ध संयुक्त रूप से प्रभावी लड़ाई लड़ने एवं आम नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ


