बिल्हा में किसान की निजी भूमि पर PWD इंजीनियर की दबंगाई; उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बिना सीमांकन जबरन सड़क निर्माण का आरोप
बिल्हा। नगर पंचायत बिल्हा के वार्ड क्रमांक 13 (मेन रोड, मंगल सांस्कृतिक भवन के पास) से एक बेहद हैरान करने वाला और प्रशासनिक तानाशाही का मामला सामने आया है। यहाँ एक पीड़ित किसान रूपचंद अग्रवाल की निजी स्वामित्व वाली भूमि (खसरा नंबर 54/7, कुल रकबा 77 डिसमिल) पर लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियर द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना और बिना राजस्व विभाग के सीमांकन के, जेसीबी लगाकर जबरन सड़क निर्माण कराने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित किसान ने प्रेस के माध्यम से माननीय कलेक्टर एवं एसडीएम महोदय से न्याय की गुहार लगाते हुए निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?
पीड़ित किसान रूपचंद अग्रवाल के स्वामित्व की कुल 77 डिसमिल भूमि में से ‘अरपा भैंस झार परियोजना’ के अंतर्गत नहर निर्माण हेतु 20 डिसमिल जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसके बाद किसान की 57डिसमिल बचत भूमि शेष रह गई थी। नियमतः नहर विभाग और राजस्व विभाग को इस बचत भूमि का सीमांकन कर किसान को उसकी वास्तविक जमीन सौंपनी थी। किसान द्वारा बार-बार लिखित एवं मौखिक निवेदन के बावजूद आज दिनांक तक जिम्मेदार विभागों द्वारा सीमांकन नहीं किया गया।

इसी लापरवाही का फायदा उठाते हुए, वर्तमान में PWD के इंजीनियर (तिवारी जी) द्वारा बिना किसी नोटिस या सूचना के किसान की इस निजी बचत भूमि पर जेसीबी चलाकर सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।
तहसीलदार के सामने ही इंजीनियर की मनमानी और बदमाशी
जब पीड़ित किसान ने अपनी निजी भूमि को सुरक्षित करने के लिए उसके चारों ओर गड्ढे खुदवाए, तो PWD इंजीनियर तिवारी ने अपनी दबंगई दिखाते हुए फिर से जेसीबी लगवाकर उन गड्ढों को पटवा दिया। मौके पर जब तहसीलदार को बुलाया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिर्फ ‘निवेदन’ करने को कहा था, गड्ढा पाटने या जबरन निर्माण का कोई आदेश नहीं दिया था।
हैरानी की बात यह है कि जब किसान ने तहसीलदार से तुरंत सीमांकन कराने की मांग की, तो PWD इंजीनियर ने प्रशासनिक नियमों को ठेंगे पर रखते हुए तहसीलदार के सामने ही कहा कि:
“रोड तो आज ही बनेगी, सीमांकन में 3-4 दिन का समय लग जाएगा।”

इस विवाद के बीच तहसीलदार बिना कोई ठोस निर्णय लिए मौके से चले गए, जिससे इंजीनियर के हौसले और बुलंद हो गए। सरेआम मेन रोड पर आम जनता के सामने PWD इंजीनियर द्वारा किसान को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उसकी निजी संपत्ति पर अतिक्रमण की कोशिश की गई।
उद्योगपतियों के दबाव में काम कर रहा प्रशासन?
किसान रूपचंद अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले के पीछे क्षेत्र के बड़े उद्योगपतियों (मंगल स्पंज आयरन एवं डोलोमाइट) का आशंका है। इन रसूखदार उद्योगपतियों के भारी वाहनों और ट्रकों को रास्ता देने के लिए PWD के अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर किसान की जमीन हड़पना चाहते हैं। जबकि इन उद्योगपतियों के पास अपनी खुद की निजी भूमि और संसाधन मौजूद हैं। अधिकारियों के इस अड़ियल और तानाशाही रवैये से साफ प्रतीत होता है कि वे उद्योगपतियों के दबाव में काम कर रहे हैं।
कलेक्टर और एसडीएम से तत्काल कार्रवाई की मांग
पीड़ित किसान अपनी जमीन पर खेती करना चाहता है और मवेशियों से फसल की रक्षा के लिए घेराबांदी कर रहा था, जिसे PWD इंजीनियर ने पूरी तरह बर्बाद कर दिया। किसान ने प्रेस नोट के माध्यम से माननीय कलेक्टर महोदय (बिलासपुर) एवं एसडीएम महोदय से करबद्ध प्रार्थना की है कि:
इस पूरे मामले को तत्काल संज्ञान में लिया जाए।
किसान की निजी बचत भूमि पर हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण को तुरंत रुकवाया जाए।
राजस्व विभाग की टीम भेजकर तत्काल भूमि का निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए।
अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने वाले और किसान को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाले PWD इंजीनियर तिवारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।


