उमा खरे की रिपोट
डिप्टी कलेक्टर की कड़ी फटकार के बाद झुका ठेकेदार: सीपत-बलौदा मार्ग की बदहाली पर फूटा क्षेत्रवासियों का आक्रोश, 24 घंटे में 19.84 करोड़ का एग्रीमेंट फाइनल
अर्जुन वस्त्रकार, अजय यादव, शशिकांत, श्याम सुंदर सहित क्षेत्रवासियों के प्रतिनिधिमंडल ने सौंपी थी मांगों की सूची; भारी वाहनों के ट्रेन की तरह कतारबद्ध होकर चलने और ओवर-स्पीडिंग पर रोक लगाने की उठी प्रमुख मांग।
आम जनता की सुरक्षा के लिए नो-एंट्री का समय निर्धारित करने, हिंदादिह के खतरनाक ‘S’ मोड़ पुल को सीधा करने और नाली निर्माण का सौंपा ज्ञापन।

अपर कलेक्टर/डिप्टी कलेक्टर श्री शिव कुमार बनर्जी ने PWD अधिकारियों को फोन पर लगाई फटकार, तब जाकर हरकत में आया विभाग।
31 मई तक धरातल पर नियमित जल छिड़काव शुरू न होने पर 1 जून से क्षेत्रवासियों द्वारा ‘शांतिपूर्ण अधिकार आंदोलन’ की चेतावनी।

बिलासपुर। सीपत-बलौदा मुख्य मार्ग की जर्जर स्थिति, जानलेवा धूल के गुबार और भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही से त्रस्त ग्रामीण जनता का सब्र अब टूट चुका है। इस गंभीर जन-समस्या को लेकर क्षेत्र के सजग सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुन वस्त्रकार के नेतृत्व में क्षेत्रवासियों के एक सशक्त प्रतिनिधिमंडल, जिसमें प्रमुख रूप से अजय यादव, श्याम सुंदर, शशिकांत, क्रांति, सूरज एवं अन्य प्रबुद्ध नागरिक शामिल थे, ने बिलासपुर के अपर कलेक्टर/डिप्टी कलेक्टर श्री शिव कुमार बनर्जी जी से सीधे मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने पूरे क्षेत्र की पीड़ित जनता की आवाज बनकर उन्हें एक कड़ा व विस्तृत मांग पत्र सौंपा। मामले की संवेदनशीलता और जन-स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए डिप्टी कलेक्टर श्री शिव कुमार बनर्जी ने तत्काल कड़ा संज्ञान लिया और लोक निर्माण विभाग (PWD) के उच्च अधिकारियों को फोन पर कड़ी फटकार लगाते हुए अविलंब कार्रवाई के सख्त निर्देश जारी किए।


डिप्टी कलेक्टर महोदय की इस कड़ी फटकार और चौतरफा जनदबाव का ही यह सीधा असर हुआ कि पिछले डेढ़ महीने से कछुआ गति से चल रही टेंडर प्रक्रिया में अचानक तेजी आई। जो ठेकेदार नुकसान का बहाना बनाकर फाइल दबाकर बैठा था, विभाग ने उसे मात्र 24 घंटे के भीतर तलब किया और 19 करोड़ 84 लाख 52 हजार रुपये की इस पूरी परियोजना का आधिकारिक एग्रीमेंट (अनुबंध) फाइनल करवाया।
प्रतिनिधिमंडल द्वारा आवेदन में उठाई गई प्रमुख मांगें:
ज्ञापन के मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करते हुए प्रतिनिधिमंडल के साथियों ने बताया कि केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि भारी वाहनों के आतंक से आम जनता, स्कूली बच्चों और राहगीरों की जान बचाने के लिए निम्नलिखित अनिवार्य मांगें प्रमुखता से रखी गई हैं:
1️⃣ ट्रेन की तरह कतारबद्ध होकर चलने वाली गाड़ियों पर रोक: इस मार्ग पर हाइवा और भारी वाहन एक-एक करके चलने के बजाय 10 से 12 गाड़ियाँ एक साथ कतारबद्ध होकर (ट्रेन की तरह) एक के पीछे एक लगातार चलती हैं। इससे पूरी सड़क ब्लॉक हो जाती है और धूल का ऐसा अंधड़ उठता है कि पीछे चल रहे राहगीरों या दोपहिया वाहन चालकों को सामने का कुछ भी दिखाई नहीं देता, जो हर वक्त जानलेवा दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बन रहा है। इस घातक ढर्रे को तुरंत बंद कराया जाए।
2️⃣ ओवर-स्पीड (तेज रफ्तार) पर सख्त नियंत्रण: इस मार्ग पर भारी वाहन अत्यंत तेज और लापरवाही पूर्वक दौड़ते हैं। प्रशासन से मांग की गई है कि स्पीड ब्रेकर, साइन बोर्ड और पुलिस चेकिंग के माध्यम से वाहनों की रफ्तार पर तत्काल सख्त नियंत्रण लगाया जाए।
3️⃣ नो-एंट्री का समय निर्धारण: क्षेत्र के स्कूलों, दफ्तरों और आम जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही हेतु नो-एंट्री का समय कड़ाई से निर्धारित किया जाए।
4️⃣ हिंडाडीह ‘S’ मोड़ पुल को सीधा करना व नाली निर्माण: मार्ग पर स्थित हिंदादिह का खतरनाक ‘S’ मोड़ पुल दुर्घटनाओं का मुख्य केंद्र है, इसे पूरी तरह सीधा किया जाए और पुलिया का नवनिर्माण हो। साथ ही सड़क की लंबी उम्र के लिए दोनों ओर सुव्यवस्थित नाली निर्माण आवश्यक है।
5️⃣ तात्कालिक संधारण में सुधार: मार्ग के तात्कालिक रखरखाव (Maintenance) और रीपेयरिंग के नाम पर हो रही खानापूर्ति को बंद कर खतरनाक गड्ढों की पक्की कंक्रीट फिलिंग (CC Filling) कराई जाए, ताकि धूल उड़ना बंद हो।
प्रमुख संगठनों का मिला सीधा समर्थन और वास्तविक एकजुटता
जनता के इस स्वतः स्फूर्त आंदोलन और दर्द को जायज ठहराते हुए ‘आजाद युवा संगठन’ के प्रमुख आदरणीय इश्हाक कुरैशी जी, ‘छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना’ एवं क्षेत्र के अन्य प्रबुद्ध जनसंगठनों ने भी इस लड़ाई को अपना पूर्ण, सीधा और निःशर्त समर्थन दिया है। कल डिप्टी कलेक्टर कार्यालय के समक्ष भी इन सभी संगठनों की उपस्थिति इसी सीधे तालमेल और वास्तविक जन-एकजुटता का परिणाम थी।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यह किसी प्रकार के व्यक्तिगत प्रचार का जरिया नहीं, बल्कि हमारे क्षेत्र के मान-सम्मान और स्वास्थ्य की सामूहिक लड़ाई है। अखबारों में एग्रीमेंट फाइनल होने की खबर का हम स्वागत करते हैं, लेकिन जनता को केवल कागजी दिलासा नहीं बल्कि धरातल पर तत्काल राहत चाहिए। जब तक नई सड़क का निर्माण जमीनी तौर पर हमारे गांवों तक नहीं पहुँचता, तब तक उड़ती धूल को रोकने के लिए नियमित रूप से मार्ग पर दिन में कम से कम 4 बार पानी का छिड़काव किया जाए।
प्रशासन को 31 मई तक का समय दिया गया है, यदि सुधार नहीं हुआ तो समस्त क्षेत्रवासी मिलकर 1 जून से शांतिपूर्ण अधिकार आंदोलन और क्रमिक धरने के लिए विवश होंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।


