संवाददाता रुपचंद अग्रवाल की रिपोट
बिल्हा बीपीएम अनिल गरेवाल पर वित्तीय अनियमितता का आरोप, रायपुर से पहुंची जांच टीम
बिलासपुर/बिल्हा:राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत बिल्हा ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वर्ष 2014 से 2021 के बीच हुई भारी वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। एनएचएम आयुक्त और अपर संचालक (वित्त) द्वारा गठित उच्चस्तरीय जांच समिति सोमवार सुबह 11:00 बजे बिल्हा बीएमओ कार्यालय पहुंची। इस जांच समिति के अध्यक्ष भावेश दुबे (अपर संचालक, वित्त) के साथ समिति सदस्य बिलासपुर पहुंचे और दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की।
इस पूरे प्रकरण में बिल्हा बीपीएम अनिल गरेवाल और तत्कालीन लिंगयाडीह चिकित्सा अधिकारी डॉ. मधुरिमा श्रीवास मुख्य रूप से जांच के दायरे में हैं।

जांच के मुख्य बिंदु एवं वित्तीय गड़बड़ियां:
दस्तावेजों में लीपापोती का आरोप: पूर्व में ईओडब्ल्यू (EOW) और एसीबी (ACB) से शिकायत के बाद लगभग 2000 पन्नों के दस्तावेज जमा किए गए थे। हालांकि, आरोप है कि जांच समिति ने इसे महज 200 पन्नों की फाइल तक सीमित कर दिया है।
जीवनदीप समिति में फर्जीवाड़ा: लिंगयाडीह, बेलतरा और बिल्हा में जीवनदीप समिति के खातों के फर्जी संचालन और लाखों रुपये के घोटाले की बात सामने आई है। नियमों को ताक पर रखकर बिना साधारण सभा की बैठक के द्वितीय हस्ताक्षरकर्ता नियुक्त किया गया और अवैध तरीके से चेक साइन कर बिल पास किए गए।
अधिकार क्षेत्र से बाहर कार्य: वित्तीय अधिकार न होने के बावजूद बीपीएम को 9 माइक्रोस्कोप की खरीदी में दोषी पाया गया है। साथ ही बेलतरा में लगभग ₹52,000 के बिल पास किए गए, जिनकी वसूली नोटिस मिलने के बाद भी नहीं की गई।
2018 के बाद से संविदा सेवा अवधि (एक्सटेंशन) नहीं: अनिल गरेवाल वर्ष 2018 के बाद बिना किसी संविदा एक्सटेंशन लेटर के अब तक बिल्हा बीपीएम पद पर बने हुए हैं। बिना सेवा विस्तार के पद पर बने रहना और वेतन भुगतान पाना पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस पूरे मामले में बेलतरा, बिल्हा और लिंगयाडीह के तत्कालीन बीएमओ पर भी गाज गिर सकती है। देखना होगा कि जांच निष्पक्ष दिशा में आगे बढ़ती है या दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो पाती है।



