अमेरिका प्रवास में भी कायम रखी भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था
स्वतंत्र पत्रकार मोहन मदवानी ने परिवार संग की श्री गणेश जी की विशेष पूजा-अर्चना
बिलासपुर/अमेरिका:वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार मोहन मदवानी इन दिनों अमेरिका के प्रवास पर हैं। विदेश की चकाचौंध और आधुनिक परिवेश के बीच रहते हुए भी उन्होंने अपनी भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सनातन आस्था को पूरी श्रद्धा के साथ जीवंत रखा है। अमेरिका में अपने परिवार के साथ मिलकर उन्होंने विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की विधिवत पूजा-अर्चना की और आरती उतारकर लोक-कल्याण एवं सुख-समृद्धि की कामना की।

इस अवसर पर मोहन मदवानी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्थान चाहे कोई भी हो—देश हो या विदेश—भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराएं ही हम सभी की मूल पहचान हैं। इन्हें जीवंत रखने के लिए भौतिक सीमाओं की नहीं, बल्कि मन की श्रद्धा, पवित्रता और अटूट विश्वास की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब युवा और परिवार कार्य या शिक्षा के सिलसिले में विदेशों में बस रहे हैं, ऐसे में आधुनिक जीवनशैली को अपनाते हुए भी अपनी जड़ों, संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। परिवार के साथ मिलकर धार्मिक अनुष्ठान करने से नई पीढ़ी को भी अपनी समृद्ध परंपराओं और मौलिक संस्कारों का ज्ञान मिलता है।
उल्लेखनीय है कि श्री मदवानी अपने पुत्र, बहू और नाती-पोतों से मिलने के लिए अमेरिका प्रवास पर गए हुए हैं। वे यहाँ लगभग पांच माह तक रहेंगे। हालांकि इससे पूर्व भी वे अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने अपने इस वर्तमान दौरे को एक बेहद निजी और आत्मीय पारिवारिक यात्रा बताया।
अपनी यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने भावुक मन से कहा कि विदेश में अपने प्रियजनों और नाती-पोतों के साथ समय बिताने की असीम खुशी तो है, लेकिन इसके साथ ही अपनी मातृभूमि, अपनी मिट्टी और देश की महक से दूर रहने का एक मौन अहसास भी हमेशा मन में बना रहता है। विदेश की धरती पर भारतीय तीज-त्योहार और पूजन परंपराएं मनाकर वे न केवल देश से जुड़ी यादों को ताजा रख रहे हैं, बल्कि प्रवासी भारतीयों के लिए भी अपनी संस्कृति से जुड़े रहने का एक प्रेरक संदेश दे रहे हैं।



