मांडाभर्री में सेवा सेतु सह मेगा स्वास्थ्य शिविर, गांव में ही मिली विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं
1015 ग्रामीणों ने कराया स्वास्थ्य परीक्षण, 31 बालिकाओं को लगाया गया एचपीवी टीका, 15 गर्भवती महिलाओं सहित 19 लोगों की हुई सोनोग्राफी,
उत्तर बस्तर कांकेर, 06 अक्टूबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आज नरहरपुर विकासखंड के ग्राम मांडाभर्री में जिला स्तरीय सेवा सेतु सह मेगा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन की अभिनव पहल के तहत दूरस्थ ग्रामीणों को उनके गांव में ही विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शिविर में स्त्री रोग विशेषज्ञ, नाक-कान-गला विशेषज्ञ, जनरल मेडिसिन तथा हड्डी रोग विशेषज्ञ सहित अन्य चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, साथ ही शिविर स्थल पर सोनोग्राफी की सुविधा के अलावा एक्स-रे की भी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे गर्भवती ग्रामीण महिलाओं को अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराने, हड्डी की समस्या से पीड़ित व्यक्तियों को एक्स-रे कराने में सुविधा मिल रही है। शिविर में ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर स्वास्थ्य जांच एवं उपचार का लाभ लिया। विधायक श्री आशाराम नेताम एवं कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार और जिला पंचायत सीईओ श्री हरेश मण्डावी ने मेगा स्वास्थ्य शिविर में मरीजों के उपचार का अवलोकन कर चिकित्सकों से जानकारी भी ली।
शिविर में कुल 1015 लोगों का ओपीडी पंजीयन किया गया। इस दौरान 19 लोगों की सोनोग्राफी की गई, जिसमें 15 गर्भवती महिलाएं शामिल थीं। गांव में ही सोनोग्राफी जैसी विशेषज्ञ जांच की सुविधा मिलने से गर्भवती महिलाओं को दूर शहर या अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। इसके अलावा 89 लोगों का एक्स-रे, 441 लोगों की रक्त जांच और 706 लोगों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। 86 लोगों को निःशुल्क चश्मे प्रदान किए गए तथा 93 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। शिविर में 34 लोगों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए और 04 लोगों ने रक्तदान कर ‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना को मजबूत किया।
गांव में ही सोनोग्राफी से गर्भवती महिलाओं को राहत
ग्राम मंडाभर्री निवासी आशुबती नेताम सोनोग्राफी कराने शिविर में पहुंचीं। उन्होंने बताया कि गांव में ही निःशुल्क सोनोग्राफी की सुविधा मिलने से उन्हें शहर नहीं जाना पड़ा। इससे समय और आने-जाने में होने वाला खर्च दोनों बचा। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्वास्थ्य सुविधा गांव में मिलने से ग्रामीणों को काफी सहूलियत हो रही है। आशुबती नेताम ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
एचपीवी टीकाकरण से किशोरियों को गंभीर बीमारियों से बचाव का संदेश
शिविर में किशोरियों के स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 31 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण किया गया। एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) संक्रमण से भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों, विशेषकर सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम करने की दिशा में यह टीकाकरण महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा बालिकाओं एवं उनके परिजनों को टीकाकरण के महत्व की जानकारी भी दी गई।
शविर में एचपीवी का टीका लगवाने वाली कुमारी स्वाति शोरी ने बताया कि उन्होंने यह टीका भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों से बचाव के उद्देश्य से लगवाया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें टीके के महत्व की जानकारी दी गई, जिससे उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने का अवसर मिला।


फ्लोरोसिस से बचाव के लिए स्कूली बच्चों को नॉन-फ्लोराइडेट टूथपेस्ट
स्वास्थ्य जागरूकता के तहत शिविर में स्कूली बच्चों के दांतों की जांच कर उनमें फ्लोरोसिस के संभावित लक्षणों की पहचान की गई। अधिक फ्लोराइड युक्त पानी के लंबे समय तक सेवन से दांतों में फ्लोरोसिस की समस्या हो सकती है, जिसके कारण दांतों पर सफेद, पीले या भूरे रंग के धब्बे दिखाई दे सकते हैं। इसके बचाव और मौखिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 32 स्कूली बच्चों को निःशुल्क नॉन-फ्लोराइडेट टूथपेस्ट वितरित किया गया। कुमारी अदिति मंडावी, स्कूली छात्रा ने बताया कि जांच के दौरान उनके दांतों में पीलापन और भूरापन होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्हें नॉन-फ्लोराइडेट टूथपेस्ट प्रदान किया गया तथा चिकित्सकों ने उन्हें कैल्शियम एवं आयरन युक्त पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी। अदिति ने अपनी उम्र के अन्य बच्चों से भी पौष्टिक भोजन लेने और अपने दांतों की नियमित देखभाल करने की अपील की। शिविर में 3 एनीमिया जांच सहित अन्य स्वास्थ्य परीक्षण भी किए गए। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, स्वच्छता एवं बीमारियों की रोकथाम के संबंध में आवश्यक जानकारी दी।
सेवा सेतु सह मेगा स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से जिला प्रशासन का उद्देश्य ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूरस्थ क्षेत्रों से शहर तक आने की कठिनाई से राहत देते हुए विशेषज्ञ जांच, उपचार, दवाइयां और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं गांव के करीब उपलब्ध कराना है।


