बिलासपुर | विशेष संवाददाता ,विश्व हिंदी परिषद की छत्तीसगढ़ इकाई के तत्वावधान में आगामी ‘अंतरराष्ट्रीय अटल भारत रत्न’ विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों को लेकर रविवार को एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक संपन्न हुई। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संगीता बनाफर के कुशल संयोजन एवं संचालन में आयोजित इस बैठक में छत्तीसगढ़ के विभिन्न संभागों और जिलों से भारी संख्या में पदाधिकारी व साहित्यकार सम्मिलित हुए।
वंदना से हुआ शुभारंभ और गूंजे साहित्यिक स्वर
समारोह का भव्य शुभारंभ सीमा भट्टाचार्य द्वारा प्रस्तुत माँ सरस्वती की वंदना एवं वीणावादिनी के चरणों में समर्पित हिंदी वंदना के स्वरों के साथ हुआ। इसके पश्चात, बैठक की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ संरक्षक डॉ. आर. सी. श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि “भाषा केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि किसी राष्ट्र के प्राण-तत्व का स्पंदन है।” शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत रायगढ़ में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आमंत्रण प्राप्त होने के कारण वे व्यक्तिगत रूप से दिल्ली के कार्यक्रम में नहीं जुड़ सके, जिसके लिए उन्होंने खेद जताते हुए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
महायज्ञ के रूप में हो हिंदी का संवर्धन: डॉ. विपिन कुमार
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार (दिल्ली) ने विचार रखते हुए कहा कि “यह राष्ट्रीय पुनरुत्थान का एक महायज्ञ है, जिसमें हम सभी को अपनी वैचारिक आहुति देनी है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भाषा जब पुस्तकों के पन्नों से निकलकर जन-जन की धड़कन बनेगी, तभी उसका लोक-मंगल सिद्ध होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय एवं विभिन्न राज्यों के राज्यपालों से हुई सकारात्मक चर्चाओं का जिक्र करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान राज्यपाल व मुख्यमंत्री से हुई भेंट के बाद राज्य में भी एक वृहद आयोजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
अति विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. देवी प्रसाद मिश्र (दिल्ली) ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि इस वैश्विक मंच पर देश के साथ-साथ 13 अन्य देशों के हिंदी प्रेमी भी जुड़ रहे हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. नंद किशोर शाह (बिहार) ने भी अपने उद्बोधन से सभी को प्रेरित किया।
‘जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध’
बैठक के अंत में अपने ओजस्वी और क्रांतिकारी संबोधन में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संगीता बनाफर ने हुंकार भरते हुए कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा के पद पर आसीन कराने के इस पवित्र यज्ञ में वह अपनी अंतिम श्वास तक सतत साधना-रत रहेंगी। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों— “जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध”—को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि आज वे लोग जो भाषा के इस संघर्ष में तटस्थ बैठे हैं, उन्हें इतिहास कभी क्षमा नहीं करेगा। शहीदों के सपनों के स्वतंत्र राष्ट्र की स्वतंत्र राष्ट्रभाषा के रूप में हमें हिंदी को उसका प्राप्य अधिकार दिलाकर ही रहना होगा।
विभिन्न जिलों और संभागों से रही सक्रिय सहभागिता
बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों ने अपने ‘मन की बात’ साझा करते हुए सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया। इस दौरान जांजगीर जिले से जिला अध्यक्ष डॉ. सुरेश पैगवार व समस्त पदाधिकारी, दुर्ग संभाग से संयोजक डॉ. शशिभूषण मिश्रा व समस्त पदाधिकारी, सरगुजा जिले से संयोजक डॉ. सपन व समस्त पदाधिकारी, रायगढ़ जिले से जिला अध्यक्ष मनीषा अवस्थी व समस्त पदाधिकारी तथा बिलासपुर जिले से लगभग समस्त पदाधिकारी व गणमान्य सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष डॉ. आर. सी. श्रीवास्तव ने सभी का आभार व्यक्त किया। उक्त संपूर्ण जानकारी विश्व हिंदी परिषद के मीडिया प्रभारी शिवनंदन शुक्ला द्वारा दी गई ।


