पापांकुशा एकादशी पर विशेष पूजा, रामायण पाठ से भक्तिमय हुआ माहौल
हांफा/ सकरी
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पावन पापांकुशा एकादशी के सुअवसर पर गुरुवार को सकरी स्थित हॉफा के प्राचीन सिद्ध बघर्रा पाठ नृसिंह भगवान मंदिर में श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत माहौल देखने को मिला इस धार्मिक उत्सव के उपलक्ष्य में मंदिर पर मानस परिवार के सहयोग से विशेष पूजा-अर्चना एवं रामायण पाठ का भव्य आयोजन किया गया सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटना शुरू हो गई थी मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य धनेश उपाध्याय के सानिध्य में भगवान नृसिंह और माता लक्ष्मी की मूर्ति का गंगाजल, दूध और पंचामृत से अभिषेक किया इसके बाद भगवान का भव्य श्रृंगार कर उन्हें विशेष भोग, फल और तुलसी दल अर्पित किए गए मध्याह्न काल में मंत्रोच्चार के बीच रामायण पाठ का शुभारंभ किया गया सुप्रसिद्ध मानस मंडली के गायकों द्वारा ढोलक और मंजीरों की थाप पर गाई जा रही रामायण की चौपाइयों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा ‘मंगल भवन अमंगल हारी…’ जैसी चौपाइयों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूमते नजर आए मंदिर में दर्शन के लिए आए भक्तों ने भगवान नृसिंह के जयकारे लगाए, जिससे पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया इस अवसर पर मंदिर के मुख्य पुजारी ने पापांकुशा एकादशी का महत्व बताते हुए कहा कि यह व्रत मनुष्य के सभी जाने-अनजाने में किए गए पापों पर अंकुश लगाता है और जीवन में सुख-समृद्धि व मोक्ष की राह खोलता है इस दिन भगवान विष्णु के अवतारों की पूजा और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है देर शाम भगवान नृसिंह की भव्य महाआरती उतारी गई, जिसमें महिला, पुरुष और बच्चों ने हिस्सा लिया आरती के पश्चात उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के बीच विशेष प्रसाद का वितरण किया गया !

इसके बाद आयोजित भंडारे में भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण किया कार्यक्रम को सफल बनाने में इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में पंडित रामकुमार उपाध्याय, पंडित रमेश अवस्थी, पंडित डॉ महेंद्र दुबे, पंडित संजय तिवारी, पंडित किरण दुबे, पंडित केजू राम शर्मा, भेदी कैवर्त, पंडित रमेश उपाध्याय , रामलाल कश्यप,माधव श्रीवास,भगवत प्रसाद साहू, अवधेश गुप्ता, प्रीतेश श्रीवास, श्रीमती रमा शुक्ला, श्रीमती आंचल पाण्डेय, सुश्री सोनल उपाध्याय, कृयांश उपाध्याय , सुश्री हेमाक्षी उपाध्याय , सुखाऊं राम कैवर्त,सहित भक्त उपस्थित रहे!


