शिक्षिका की डिग्री, सेंटर कोड और CVRU विश्वविद्यालय के कुलसचिव की भूमिका पर सवाल; आवेदक ने संयुक्त शिक्षा संचालक से की शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग
जांजगीर-चांपा/बिलासपुर : जिले के शिक्षा विभाग से जुड़े एक मामले में शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रामाणिकता और सूचना के अधिकार के तहत जानकारी उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामले में आवेदक ने दिनांक 26 अक्टूबर 2026 को संयुक्त शिक्षा संचालक, बिलासपुर के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत का केंद्र शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिवनी, विकासखंड नवागढ़, जिला जांजगीर-चांपा में पदस्थ शिक्षिका श्रीमती आकांक्षा तिवारी की एम.एससी. की शैक्षणिक योग्यता और उससे संबंधित अभिलेखों का सत्यापन है।
RTI से शुरू हुआ मामला, अंकसूची को लेकर उठे सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवेदक ने जनहित को ध्यान में रखते हुए 18 अक्टूबर 2025 को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत संबंधित विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताओं से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी थी। आवेदक के अनुसार, इस प्रक्रिया में शिक्षिका आकांक्षा तिवारी की एम.एससी. की अंकसूचियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। आवेदक का कहना है कि शिक्षिका द्वारा एम.एससी. अंतिम वर्ष की अंकसूची सहज रूप से उपलब्ध करा दी गई, लेकिन जब प्रथम वर्ष की अंकसूची मांगी गई, तो उसे उपलब्ध कराने पर आपत्ति जताई गई। इसी अंतर के कारण आवेदक ने संबंधित अभिलेखों के सत्यापन की मांग उठाई है। हालांकि, अंकसूची उपलब्ध कराने पर आपत्ति जताए जाने मात्र से किसी शैक्षणिक अनियमितता की पुष्टि नहीं होती; इसके लिए संबंधित दस्तावेजों और आपत्ति के आधार की जांच आवश्यक है।
शिक्षिका ने पति द्वारा संचालित परीक्षा केंद्र से की M.Sc., वर्तमान में शिक्षिका के पति उसी विश्वविद्यालय में कुल सचिव के पद पर कार्यरत
आवेदक के अनुसार, शिक्षिका आकांक्षा तिवारी ने डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, करगी रोड, कोटा, बिलासपुर से संबंधित संस्था के माध्यम से M.Sc. Physics की पढ़ाई की थी। आवेदक का आरोप है कि जिस परीक्षा केंद्र से शिक्षिका ने परीक्षा दी, वह उस समय उनके पति अरविंद कुमार तिवारी के नाम से संचालित था। आवेदक के अनुसार, अरविंद कुमार तिवारी उस समय विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारी थे और वर्तमान में विश्वविद्यालय में कुलसचिव के पद पर कार्यरत हैं।
इस संबंध में आवेदक ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त परीक्षा संबंधी टैबुलेशन रजिस्टर (TR) प्रस्तुत किया है, जिसमें जुलाई 2006 की परीक्षा के रिकॉर्ड में “परीक्षा केंद्र कोड-015 {जांजगीर} तथा अरविंद कुमार तिवारी” का नाम दिखाई देने का दावा किया गया है। वहीं, शिक्षिका आकांक्षा तिवारी की M.Sc. Physics की अंकसूची में भी “परीक्षा केंद्र कोड -015” दर्ज है।
आवेदक का कहना है कि दोनों दस्तावेजों में सामने आए इन विवरणों को देखते हुए संबंधित परीक्षा केंद्र के पंजीकरण, संचालन और परीक्षा प्रक्रिया की जांच आवश्यक है। यह भी सत्यापित किया जाना चाहिए कि संबंधित परीक्षा अवधि में केंद्र का वास्तविक संचालक कौन था और विश्वविद्यालय के अभिलेखों में उसकी क्या भूमिका दर्ज है।
जिला शिक्षा अधिकारी के दो कथित बयानों से बढ़ा विवाद
इस मामले में जांजगीर-चांपा के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार सिन्हा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इससे पहले प्रकाशित समाचार में दावा किया गया था कि एक ओर सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, वहीं दूसरी ओर एम.एससी. प्रथम वर्ष की अंकसूची को निजी जानकारी बताते हुए उपलब्ध नहीं कराए जाने संबंधी कथन सामने आया। आवेदक का कहना है कि एक ही प्रकरण में सामने आए इन कथनों के कारण सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया और विभागीय रुख को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब शिकायत के माध्यम से संबंधित आदेशों, पत्राचार और सूचना रोके जाने के आधार की जांच की मांग की गई है। दोनों कथनों का वास्तविक संदर्भ और उनकी आधिकारिक स्थिति संबंधित अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकेगी।

जानकारी नहीं मिलने पर संयुक्त शिक्षा संचालक समेत कई अधिकारियों के समक्ष की गई है शिकायत
आवेदक के अनुसार, सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी पूरी तरह उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्होंने लोक शिक्षण संचालनालय -रायपुर,संयुक्त शिक्षा संचालक-बिलासपुर तथा जिलाधीश महोदय-जांजगीर चाँपा के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की है। शिकायत में शिक्षिका की एम.एससी. की प्रथम एवं अंतिम वर्ष की अंकसूचियों, विश्वविद्यालय के परीक्षा अभिलेखों, सेंटर कोड के पंजीकरण और नियुक्ति के समय प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन कराने की मांग की गई है।
आवेदक ने यह भी अनुरोध किया है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जांजगीर-चाँपा द्वारा सूचना उपलब्ध कराने के संबंध में की गई कार्रवाई और अपनाए गए रुख की समीक्षा की जाए तथा जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब जांच पर टिकी निगाहें
पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या संबंधित विश्वविद्यालय और शिक्षा विभाग के मूल अभिलेखों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन कराया जाएगा। सेंटर कोड का पंजीकरण, परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड, अंकसूचियों की प्रामाणिकता और सूचना के अधिकार के तहत जानकारी रोके जाने के आधार की जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। फिलहाल, उपलब्ध विवरणों के आधार पर डिग्री की प्रामाणिकता या किसी अधिकारी की संलिप्तता के संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है। संयुक्त शिक्षा संचालक के समक्ष प्रस्तुत शिकायत पर विभाग की कार्रवाई और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
नोट: प्रकाशित खबर से संबंधित समस्त आवश्यक दस्तावेज के पास उपलब्ध है।यह समाचार आवेदक द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरणों और शिकायत में उठाए गए प्रश्नों पर आधारित है। संबंधित विश्वविद्यालय, शिक्षिका तथा अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्राप्त होने पर चैनल द्वारा उसे भी प्रमुखता के साथ प्रसारित किया जाएगा।



