तिल्दा नेवरा: पर्यावरण संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लाल ईटों पर में प्रतिबंध लगाया गया है। सालों बाद भी प्रतिबंध का रायपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र तिल्दा नेवरा में कोई असर नहीं है तथा धड़ल्ले से अवैध रूप से लाल ईटों का निर्माण चल रहा है।
राजधानी रायपुर जिला के ग्रामीण क्षेत्र तिल्दा नेवरा में कुछ लोगो को ही ईट भट्ठा चलने के लिए लाइसेंस दिया गया था लेकिन यहां 40 से अधिक ईंट भट्ठा चले रहे हैं। इनमें से अधिकतर ईंट भट्ठा नेताओं के द्वारा ही चलाए जा रहे हैं।
तिल्दा ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर ईंट भट्ठा अवैध रूप से चला जा रहे हैं। इनमें से बड़ी मात्रा में ईंट का उपयोग पीएम आवास और टाॅयलेट निर्माण के लिए ईंट सप्लाई किया जा रहा है। इसके अलावा दूर-दराज के नगर पालिका क्षेत्र में पार्षदों के द्वारा ईंट बनाकर नगर के निर्माण कार्याें में खपाया जा रहा है। सूत्रों की माने तो ईंट बनाने के लिए बोर सहित नहर, तालाब और नाले का पानी पंप लगाकर चोरी की जा रही है। ईंट बनाने के लिए कोयला व बिजली की भी चोरी की जा रही है।
आप को बता दे कि ईंट भट्ठा लगाने से पहले पंचायत या नगर पालिका व तहसीदार से एनओसी लेना पड़ता है। इसके बाद ही खनिज विभाग द्वारा लायसेंस जारी किया जाता है। लेकिन तिल्दा नेवरा और तिल्दा ब्लॉक में इन नियमों को ताक पर रखकर ईंट भट्ठों का संचाल किया जा रहा है। िमट्टी खुदाई से कई जगह गहरी खदान बन गई गांव-गांव और नगर में टॉयलेट और पीएम आवास निर्माण के लिए पार्षद तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सचिव सरपंच मिलकर ईंट बनाने का काम कर रहे है।
अवैध ईंट भट्ठा संचालन करने वाले लाईसेंस लेना जरूरी नहीं समझते हैं।
तिल्दा नेवरा नगर पालिका और आस-पास के गांवों में पीएम आवास बनाने में फ्लाई-एश की जगह लाल ईंट बनाया जा रहा है। जबकि शासन का आदेश हैं कि सरकारी निर्माण में लाल ईंट का उपयोग नहीं किया जाना है। इसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों सहित नगर पालिका तिल्दा नेवरा में फ्लाई एश की जगह लाल ईंट का उपयोग किया जा रहा है। पर इस ओर किसी के द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।वहीं नाम नहीं छापने की शर्त पर कई पंचायत सचिवों ने बताया कि कई सरपंच स्वयं ही ईंट भट्ठा चला रहे हैं या उनसे मिले हुए हैं। ईंट भट्ठा के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जमकर पेड़ काटे जा रहे हैं। लेकिन इस ओर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसलिए बखौफ संचालन हो रहा है।
हर साल राजस्व का हो रहा है नुकसान
ईंट भट्टों में एक लाख से अधिक ईंट के उत्पादन पर लगभग 30 हजार रूपए राजस्व बनता है। इधर जिले में इसकी तुलना की जाए, तो यहां खनिज विभाग के अनुसार 40 से अधिक अवैध ईंट भट्ठे चल रहे हंै। मतलब सरकार को 15 से 20 लाख से अधिक का राजस्व नुकसान हो रहा है।
पर्यावरण और खनिज विभाग से अनुमति के बिना चल रहे ईंट भट्ठों को बंद करने का अधिकार खनिज विभाग को है लेकिन नेताओं के आगे वे भी बेबस नजर आते हैं। तिल्दा नेवरा नगर पालिका क्षेत्र स्थित दो किलोमीटर के दायरंे में ही दर्जनभर अवैध ईंट भट्ठों का संचालन हो रहा है ग्राम पंचायत सिनोधा,खपरीकला, कोटा,तुलसी नेवरा, बरतोरी, सरोरा परसदा, बिलाड़ी के दो किलोमीटर के दायरंे में ही दो दर्जन से अधिक अवैध ईंट भट्ठों का संचालन हो रहा है।
अवैध ईंट भट्ठों पर कार्रवाई नहीं होने से तिल्दा नेवरा नगर सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के अवैध ईंट भट्ठा बड़े पैमाने पर चल रहे हैं।

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