
रिपोर्टर — सुरज पुरेना
बिलासपुर में अपराधियों के हौसले बुलंद, नशे की हालत में दिनदहाड़े दे रहे घटना को अंजाम…
सिंगल में खड़ी कार को ठोक शराबी युवक ने छात्र से की अभद्रता,पुलिस की कार्य प्राणली पर उठने लगी सवाल…

बिलासपुर का मंगला चौक सिग्नल, 10 अगस्त की रात। एक कॉलेज स्टूडेंट अपनी होंडा सिटी (CG10AP7500) सिग्नल पर खड़ी कर इंतजार कर रहा था। पीछे से आती थार (CG10BP7772) का लापरवाह, अकड़ू और नशे में चूर ड्राइवर, ब्रेक लगाने की बजाय सीधा धड़ाम से टक्कर मार देता है। कार का पिछला हिस्सा चकनाचूर, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।जब स्टूडेंट ने गुस्से में पूछा — “अंधा है क्या?” — तो थार वाला और उसके लफंगे साथी भड़क उठते हैं। सड़क पर खड़े होकर मां-बहन की गालियां, धक्का-मुक्की, और ऊपर से जान से मारने की धमकी!
इतना ही नहीं, सबूत के लिए फोटो खींच रहे छात्र का मोबाइल छीनकर रोड पर पटक दिया, जिससे मोबाइल भी मौके पर ‘शहीद’ हो गया।और सोचिए, ये सब शहर के बीचों-बीच, पुलिस की नाक के नीचे हो रहा था। आरोपी आराम से निकल गए, और पीड़ित को थाना सिविल लाइन में जाकर रिपोर्ट लिखानी पड़ी। सवाल ये है कि आखिर ये थार वाले गुंडे इतने हौसले से कैसे घूम रहे हैं? क्या पुलिस सिर्फ कागजों में ही कानून बचा रही है?ये घटना सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं, बल्कि खुली चुनौती है — “हम जो चाहें करेंगे, कोई हमें रोक नहीं सकता।” अगर पुलिस ऐसे मामलों में भी तुरंत कार्रवाई नहीं करती, तो फिर आम आदमी को कानून से क्या उम्मीद बचती है? बिलासपुर में गुंडागर्दी और पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली, दोनों की पोल इस घटना ने खोल दी है।