धार्मिक कार्यक्रम में उत्पात और मारपीट: बिलासपुर पुलिस से आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) | 24 मार्च 2026बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत चैत्र चंद्र झूलेलाल जयंती के पावन अवसर पर आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में असामाजिक तत्वों द्वारा विघ्न डालने और मारपीट करने का गंभीर मामला सामने आया है। आसनदास गली एवं भोजवानी गली के निवासियों ने इस घटना को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से लिखित शिकायत कर आरोपियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
घटना का विवरण:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 20 मार्च 2026 को आसनदास हिंदूजा के निवास के समक्ष सिंधु युवा मंच द्वारा शोभायात्रा के भव्य स्वागत हेतु संगीत एवं प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी दौरान महेश जगयसी नामक व्यक्ति ने कार्यक्रम में पहुँचकर अशोभनीय व्यवहार किया और व्यवधान उत्पन्न करना शुरू कर दिया।

बेल्ट और मुक्कों से हमला:
विवाद के दौरान नीरज मोटवानी (मिनोचा कॉलोनी), निर्मल सोनी का पुत्र एवं उनके अन्य साथियों ने वहां उपस्थित महेश मोटवानी के साथ बेल्ट, हाथ और मुक्कों से बर्बरतापूर्वक मारपीट की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपी इसके बाद अपने पिता चंद्रपाल एवं अन्य सहयोगियों के साथ पुनः मौके पर पहुंचे और दोबारा हमला कर दिया। इस हिंसक कृत्य से कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं और बच्चों के बीच भगदड़ मच गई और धार्मिक वातावरण पूरी तरह अशांत हो गया।
प्रमुख गवाह और सुरक्षा की चिंता:
घटना के समय सिंधी समाज के कई गणमान्य नागरिक मौजूद थे, जिनमें हरिकिशन गंगवानी (सह सचिव, प्रेस क्लब), जसपाल पेशवानी, मोहन बजाज, अनिल बजाज, राहुल रेलवानी और सच्चानंद शामिल हैं। शिकायतकर्ताओं ने यह भी अवगत कराया है कि मारपीट के बाद से पीड़ित महेश मोटवानी का कुछ पता नहीं चल पा रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर समाज में गहरा भय व्याप्त है।
पुलिस प्रशासन से मांग:
स्थानीय निवासियों और सिंधी समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि:
मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के विरुद्ध तत्काल उचित धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
धार्मिक आयोजनों में इस तरह की गुंडागर्दी रोकने के लिए आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी हो।
लापता महेश मोटवानी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
समाज के प्रबुद्धजनों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं से न केवल सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है, बल्कि भविष्य में ऐसे आयोजनों को लेकर असुरक्षा की भावना पैदा होती है।


