पत्थलगांव : वाह रे सिस्टम! 25 लाख के ‘जादू’ को छुपाने के लिए RTI को ही बना लिया ढाल, साहब बोले- सरकारी स्कूल की फाइलें हमारी ‘पर्सनल’ हैं!…
जशपुर। लगता है पत्थलगांव का इंदिरा गांधी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अब सिर्फ बच्चों को नहीं पढ़ा रहा, बल्कि कानून के जानकारों को भी ‘RTI एक्ट से कैसे बचें’ इस विषय पर ट्यूशन देने लगा है! यहाँ के सरकारी रिकॉर्ड इन दिनों इतने “निजी” (Personal) हो गए हैं कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे स्कूल के दफ्तर में सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि किसी की पर्सनल डायरी रखी हो।

भ्रष्टाचार के मामलों में पारदर्शिता का ऐसा अनोखा और हास्यास्पद उदाहरण शायद ही कहीं और देखने को मिले। जब RTI के तहत एक विशिष्ट समयावधि के दस्तावेजों की मांग की गई, तो स्कूल प्रबंधन ने जो ‘ज्ञान’ दिया है, उस पर तो तालियां बजनी चाहिए।

सरकारी पैसा, पर जानकारी ‘निजी’? गजब है! – स्कूल के प्राचार्य महोदय ने 16 अप्रैल 2026 को जारी एक पत्र के माध्यम से बड़ी ही मासूमियत से जवाब दिया है कि आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी ‘व्यक्तिगत एवं जनहित से संबंधित नहीं’ है। इसलिए RTI एक्ट की धारा 8(1)(j) का ब्रह्मास्त्र चलाकर जानकारी देने से मना कर दिया गया।
अब कोई जरा इन हुक्मरानों से पूछे कि एक सरकारी स्कूल, जो जनता के टैक्स के पैसों से चलता है, उसके रिकॉर्ड अचानक से ‘व्यक्तिगत’ कैसे हो गए? क्या स्कूल की फाइलें किसी की पुश्तैनी जायदाद बन गई हैं?
25 लाख के ‘खेले’ का छिपा है राज? – सूत्रों की मानें तो इस ‘व्यक्तिगत’ बहाने के पीछे की असली कहानी कोई पारिवारिक राज नहीं, बल्कि 25 लाख रुपये से अधिक का एक बड़ा ‘खेल’ है। खबर है कि जिस ‘पवित्र’ कालखंड के दस्तावेजों के दर्शन करने की मांग आरटीआई में की गई थी, ठीक उसी दौरान स्कूल में यह जादुई कारनामा हुआ था।
अब 25 लाख के गड़बड़झाले की फाइल अगर बाहर आ गई, तो कई सफेदपोशों के चेहरे से नकाब उतर जाएगा। इसलिए फाइलों को इतनी सुरक्षा दी जा रही है मानो स्कूल की अलमारी में कोहिनूर हीरा छिपा कर रखा गया हो। ‘अति सूक्ष्मता पूर्वक अवलोकन’ का बहाना बनाकर फाइलों को अलमारियों में ही दफन करने का यह आइडिया वाकई ऑस्कर जीतने लायक है।
ऊपर तक भेजी गई है ‘कॉमेडी’ की स्क्रिप्ट – इस पूरे वाकये का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस गोलमोल और हास्यास्पद जवाब की कॉपी बड़े गर्व से जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर (जशपुर) महोदय को भी ‘सूचनार्थ’ भेज दी गई है। शायद यह बताने के लिए कि “देखिये हुजूर, हमने कितनी सफाई से मामले को रफा-दफा कर दिया है!” अब इंतजार इस बात का है:
- क्या जिले के आला अधिकारी इस ‘कॉमेडी शो’ पर ताली बजाकर मूकदर्शक बने रहेंगे?
- या फिर इस 25 लाख के कथित ‘निजी’ खेल की कोई उच्च स्तरीय जांच होगी?
फिलहाल तो जनता यही सोच रही है कि अगर दामन इतना ही साफ है, तो दस्तावेजों को ‘पर्सनल’ बताकर छिपाने में कैसा डर? वैसे, सिस्टम की इस ‘कलाकारी’ को देखकर तो यही लगता है कि शिक्षा के इस मंदिर में कुछ और ही ‘पाठ’ पढ़ाया जा रहा है!




Bài review này nói khá đúng về cảm nhận của mình khi dùng hb88 app . TONY07-08