सागर पंचायत में जांच के दौरान बवाल! सरपंच पक्ष के समर्थकों पर दबाव बनाने का आरोप
10-15 लोगों की मौजूदगी से जांच प्रभावित होने की शिकायत, उपसरपंच समेत सात पंचों ने खोला मोर्चा; सीईओ से निष्पक्ष जांच की गुहार
जिला रिपोर्टर अश्वनी यादव
बिलासपुर/तखतपुर। ग्राम पंचायत सागर में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। पंचायत के कामकाज और राशि आहरण को लेकर शुरू हुई जांच के दौरान माहौल बिगड़ने और जांच दल पर दबाव बनाने के आरोप सामने आए हैं। उपसरपंच बाबूलाल समेत छह अन्य पंचों ने जनपद पंचायत तखतपुर के सीईओ को लिखित आवेदन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मौके पर सरपंच पक्ष के 10 से 15 समर्थकों की मौजूदगी में जांच प्रक्रिया प्रभावित करने का प्रयास किया गया, जिसके चलते बयान दर्ज करने की कार्रवाई भी नहीं हो सकी।

स्ट्रीट लाइट से लेकर पंप-पाइपलाइन तक उठे सवाल
शिकायत में सरपंच अंजुलता पांडेय, सचिव राजकुमार खुटियारे और रोजगार सहायक सुनील साहू से जुड़े पंचायत कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। स्ट्रीट लाइट, मोटर पंप, पाइपलाइन, हैंडपंप मरम्मत, सामग्री खरीदी और अन्य विकास कार्यों में खर्च की गई राशि को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन सभी बिंदुओं की दस्तावेजों के आधार पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।
जांच के बीच दबाव का आरोप, बयान भी नहीं हो सके दर्ज
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, मौके पर जांच के दौरान 10 से 15 लोगों की मौजूदगी के कारण ऐसी स्थिति बनी कि संबंधित पक्षों के बयान दर्ज नहीं हो सके। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होने की आशंका जताई गई है। उपसरपंच बाबूलाल और छह अन्य पंचों ने सीईओ से मांग की है कि जांच किसी दबाव में नहीं, बल्कि उपलब्ध दस्तावेजों, मौके की वास्तविक स्थिति और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर कराई जाए।
चैतराम और रामसागर ने भी दिया आवेदन
मामले में चैतराम अनुरागी और रामसागर नागमणि द्वारा भी जनपद पंचायत तखतपुर के सीईओ को लिखित आवेदन दिए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने और अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। अब निगाहें जनपद पंचायत प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है और संबंधित सरपंच, सचिव तथा रोजगार सहायक का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।


