[ रिपोर्टर — सुरज पुरेना ]
बिलासपुर न्यूज । सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) के निश्चेतना विभाग द्वारा विश्व निश्चेतना दिवस के अवसर पर एक दिवसीय जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन, विद्यार्थियों और स्वास्थ्य कर्मियों को निश्चेतना विशेषज्ञों की भूमिका और उनके महत्व से अवगत कराना था।
इस अवसर पर पोस्टर प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक और शैक्षणिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें ऑपरेशन से पहले मरीजों की सावधानियों, सहमति पत्र की प्रक्रिया और निश्चेतना के महत्व पर जानकारी दी गई। पोस्टर प्रतियोगिता का विषय था — “आपात स्थिति में निश्चेतना विशेषज्ञ का योगदान”, जिसमें एमबीबीएस विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार मयंक कुमार एवं पंकज को, द्वितीय पुरस्कार कृति को तथा तृतीय पुरस्कार जयेश एवं दीपक को प्रदान किया गया। निर्णायक मंडल में डॉ. आरती पांडे, डॉ. संगीता रमन जोगी एवं डॉ. आर.के. बेन शामिल थे।
कार्यक्रम का संचालन निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के नेतृत्व में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए.आर. बेन और नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप उपस्थित रहे। उन्होंने विजेताओं को सम्मानित करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर डॉ. मधुमिता मूर्ति ने कहा कि निश्चेतना विशेषज्ञ केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आईसीयू, दर्द नियंत्रण, आपातकालीन स्थितियों और कार्डियक अरेस्ट जैसी परिस्थितियों में भी अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यह दिवस समाज में निश्चेतना विशेषज्ञों के योगदान को पहचानने और सम्मान देने का अवसर है।


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