बिलासपुर: सरकंडा की एकता कॉलोनी में मच्छरों का ‘आतंक’, फागिंग मशीनें सिर्फ वीआईपी बंगलों तक सीमित
बिलासपुर। न्यायधानी का सरकंडा क्षेत्र इन दिनों मच्छरों की भारी फौज से जूझ रहा है। अशोक नगर और एकता कॉलोनी के निवासियों का जीना मुहाल हो गया है। हालात यह हैं कि शाम ढलते ही घरों के बाहर कदम रखना दूभर है, और घरों के भीतर हजारों की संख्या में मच्छर हमला कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और नगर निगम की लापरवाही के कारण क्षेत्र में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।

अगरबत्तियां और कॉइल हुए बेअसर
एकता कॉलोनी के निवासियों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि मच्छरों का प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि बाजार में मिलने वाली मच्छर भगाने वाली अगरबत्तियां, कॉइल और रिफिल मशीनें पूरी तरह फेल साबित हो रही हैं। हजारों की संख्या में झुंड बनाकर उड़ते मच्छरों ने बच्चों और बुजुर्गों की नींद उड़ा दी है। दिन के समय भी मच्छरों का आतंक कम नहीं होता, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों की आशंका से लोग डरे हुए हैं।
पार्षद और प्रशासन की अनदेखी
कॉलोनी वासियों का सीधा आरोप है कि उनके वार्ड के पार्षद और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस समस्या पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई है। नालियों में जमा गंदगी और जलजमाव मच्छरों के पनपने का मुख्य केंद्र बन गया है। शासन-प्रशासन की इस फजीहत पर जनता का कहना है कि उन्हें केवल चुनाव के समय याद किया जाता है, मूलभूत सुविधाओं के नाम पर अब केवल खोखले आश्वासन मिल रहे हैं।
वीआईपी बंगलों में मशीनें, आम जनता के लिए धुआं भी नहीं
सबसे अधिक आक्रोश इस बात को लेकर है कि नगर निगम के कर्मचारी और फागिंग (धुआं छोड़ने वाली) मशीनें केवल शासन-प्रशासन के आला अधिकारियों और सफेदपोश नेताओं के बंगलों के चक्कर काट रही हैं।
”जब अधिकारियों के बंगलों में मच्छर भगाने की मशीनें और कर्मचारी तैनात किए जा सकते हैं, तो आम जनता को इस नरक में रहने के लिए क्यों छोड़ दिया गया है? क्या टैक्स भरने वाली जनता की जान की कोई कीमत नहीं है?” — एक आक्रोशित निवासी, अशोक नगर।
मुख्य मांगें:
- नियमित फागिंग: एकता कॉलोनी और अशोक नगर की गलियों में तत्काल बड़े स्तर पर फागिंग मशीनें चलाई जाएं।
- सफाई अभियान: क्षेत्र की नालियों की गहराई से सफाई हो और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाए।
- समान वितरण: संसाधनों का उपयोग केवल वीआईपी क्षेत्रों तक सीमित न रखकर आम बस्तियों में भी किया जाए।

