सूरज वाधवानी की खास खबर
प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा संकट: DBT की गड़बड़ी से केंद्र को वापस लौटी राशि, हितग्राही दाने-दाने को मोहताज; ‘न घर के रहे न घाट के’
[बिलासपुर/ ]: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही और तकनीकी खामियों के चलते गरीबों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। योजना का लाभ मिलना तो दूर, पात्र हितग्राहियों को नगर निगम और नगर पालिका कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि अकेले स्थानीय निकाय में ही हितग्राहियों की कई फाइलें लटकी हुई हैं।
DBT के फेर में फंसी राशि, केंद्र को लौटी वापस
पीड़ित हितग्राहियों द्वारा अधिकारियों से संपर्क करने पर बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि जिन हितग्राहियों के बैंक खाते आधार कार्ड से डीबीटी के लिए लिंक नहीं थे, उनकी आवास राशि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के माध्यम से वापस केंद्र सरकार को लौट गई है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि कई हितग्राहियों द्वारा डीबीटी की प्रक्रिया पूरी कराने के 2 महीने बीत जाने के बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है।
पहली किस्त के बाद काम ठप, कर्ज के बोझ तले दबे गरीब
कई मामलों में हितग्राहियों को केवल पहली किस्त ही मिल पाई है, जिसके बाद उन्होंने अपने आशियाने का निर्माण शुरू कर दिया। अब दूसरी किस्त के लिए उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अधिकारी ‘ऊपर फाइल भेज दी है, अब जो करेगी केंद्र सरकार ही करेगी’ कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर इन परिवारों के पास इतनी पूंजी नहीं है कि वे अपने दम पर मकान पूरा करवा सकें। ऐसे में कई परिवारों की स्थिति ‘न घर के रहे न घाट के’ जैसी हो गई है।
बढ़ता कर्ज और दबाव: कई हितग्राहियों ने इस उम्मीद में कर्ज लेकर या दुकानों से उधार पर निर्माण सामग्री (सीमेंट, छड़ आदि) ली थी कि जल्द ही अगली किस्त आ जाएगी। अब किस्त न आने से दुकानदारों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे गरीबों पर भारी मानसिक और आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की मांग
गरीबों के आशियाने के साथ हो रहे इस तकनीकी खिलवाड़ पर नागरिकों में भारी आक्रोश है। हितग्राहियों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने मांग की है कि राज्य और केंद्र सरकार इस गंभीर मानवीय समस्या पर तुरंत संज्ञान ले। लटकी हुई फाइलों का निपटारा कर रूकी हुई राशि को विशेष प्रक्रिया के तहत जल्द से जल्द जारी किया जाए, ताकि गरीबों को इस दोहरे आर्थिक संकट से निजात मिल सके।


