जनता की गाढ़ी कमाई से बने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को PPP मॉडल पर सौंपने की तैयारी में सरकार: कांग्रेस
₹200 करोड़ की लागत से बने अस्पताल के निजीकरण की कोशिशों पर विजय केशरवानी ने उठाए गंभीर सवाल प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन के बावजूद पूर्ण क्षमता से शुरू नहीं हो पाया अस्पताल, स्टाफ भर्ती में देरी का आरोप

बिलासपुर में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 240 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और 100 बेड के कैंसर केयर अस्पताल के संचालन को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बिलासपुर विधानसभा पर्यवेक्षक विजय केशरवानी ने एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए सरकार पर इस सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को निजी हाथों (PPP मॉडल) में सौंपने का गंभीर आरोप लगाया है।
श्री केशरवानी ने सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए कहा:
जब अस्पताल की जमीन राज्य सरकार की है, निर्माण में जनता के टैक्स का पैसा लगा है और सभी संसाधन सरकारी हैं, तो आखिर इसे निजी भागीदारी (PPP मॉडल) में संचालित करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस मॉडल से गरीब मरीजों को क्या अतिरिक्त लाभ मिलेगा।”
कांग्रेस नेता ने चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 26 जून 2026 को जारी पत्र का हवाला देते हुए दावा किया कि सरकार संशोधित आरएफपी (RFP) और लाइसेंस एग्रीमेंट के जरिए टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर अस्पताल के निजीकरण की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि 29 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा अस्पताल का उद्घाटन किए जाने के बावजूद, विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों के पद अब तक नहीं भरे गए हैं, जिससे मरीज आधुनिक सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
कांग्रेस की मुख्य मांगें:
अस्पताल को पूरी क्षमता के साथ पूर्णतः सरकारी व्यवस्था के तहत संचालित किया जाए।
विशेषज्ञ डॉक्टरों, तकनीकी व पैरामेडिकल कर्मचारियों की तत्काल नियमित भर्ती हो।
गरीब और सामान्य वर्ग के मरीजों के लिए निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण इलाज की गारंटी दी जाए।
PPP मॉडल से संबंधित सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जाए।
कांग्रेस ने चेताया कि बिलासपुर की जनता को अस्पताल के संचालन मॉडल में बदलाव नहीं, बल्कि समयबद्ध और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं चाहिए। जनता के पैसों से बने इस अस्पताल का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ जनसेवा होना चाहिए, न कि निजी मुनाफाखोरी।
