संवाददाता रुपचंद अग्रवाल की रिपोट
बिल्हा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भगवान भरोसे: 14 में से 13 डॉक्टर नदारद, भटकने को मजबूर मरीज
लापरवाही चरम पर: आपातकालीन सेवाओं में धागा तक उपलब्ध नहीं, मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर भेजने का आरोप
बिल्हा में बनाया गया 100 बिस्तरों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महज एक खानापूर्ति बनकर रह गया है। अस्पताल की अव्यवस्था और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण यहां आने वाले मरीजों की जान जोखिम में है। ताज़ा मामले में शाम की ओपीडी के दौरान अस्पताल के 14 में से 13 डॉक्टर नदारद पाए गए, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल सका और कई गंभीर मरीजों की स्थिति नाजुक हो गई।

आपातकालीन कक्ष में केवल एक डॉक्टर को छोड़कर पूरा स्टाफ गायब मिला। गौरतलब है कि इससे पहले भी माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने इस अस्पताल की बदहाली पर संज्ञान लेकर आला अधिकारियों को फटकार लगाई थी। कुछ दिनों तक व्यवस्था सुधरने के बाद स्थिति फिर से जस की तस हो गई है। निरीक्षण के दौरान ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) और अस्पताल अधीक्षक भी गायब मिले।
अस्पताल की बदहाली: मुख्य बिंदु
- दवाइयों और सर्जिकल सामान का टोटा: अस्पताल की हालत इतनी दयनीय है कि एक्सीडेंटल केस में आने वाले मरीजों को टांका लगाने के लिए धागा तक उपलब्ध नहीं है। मरीजों के परिजनों को दवाइयों और अन्य जरूरी सामानों के लिए निजी मेडिकल दुकानों में भेजा जाता है।
- गर्भवती महिला को बिना इलाज लौटना पड़ा: कुछ दिनों पहले सुबह 5:00 बजे एक गर्भवती महिला को गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था, लेकिन ड्यूटी पर कोई डॉक्टर न होने के कारण उन्हें बिना इलाज के वापस जाना पड़ा।
- 6 दिन पुराना ड्यूटी रोस्टर: अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का आलम यह है कि आपातकालीन कक्ष के बाहर लगा ड्यूटी रोस्टर चार्ट 6 दिन पुराना (9 जुलाई की तारीख का) पाया गया, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि किस डॉक्टर की ड्यूटी कब है।
- बायोमेट्रिक अटेंडेंस को दे रहे चकमा: राज्य सरकार द्वारा अनिवार्य की गई बायोमेट्रिक उपस्थिति को भी डॉक्टर और स्टाफ धता बता रहे हैं। सुबह 9:00 बजे की ड्यूटी में कोई भी डॉक्टर 10:30 बजे से पहले नहीं पहुंचता और दोपहर 1:00 बजे तक अस्पताल छोड़ देते हैं।
अस्पताल में पदस्थ डॉक्टरों की सूची (जो नदारद मिले):
अस्पताल में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ और एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती है, इसके बावजूद मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है:
- डॉ. अजय पांडे (हड्डी रोग)
- डॉ. पंकज साहू (हड्डी रोग)
- डॉ. मनमीत थवाइट (शिशु रोग)
- डॉ. दिनेश चौहान (शिशु रोग)
- डॉ. गीता प्रधान (स्त्री रोग)
- डॉ. निकिता कंवर (स्त्री रोग)
- डॉ. नेहा कश्यप (दंत रोग)
- डॉ. ए. आर. बंजारे (एमबीबीएस)
- डॉ. हिमांशी पांडे (बोर्ड डीआर)
- डॉ. अदिति गड़ेवाल (एमबीबीएस)
- डॉ. प्रभात प्रभाकर (एमबीबीएस)
- डॉ. ओ. आर. बर्मन (एमबीबीएस)
- डॉ. श्याम सोनी (एमबीबीएस)
- डॉ. नितेश साहू (एमबीबीएस)
अधिकारी का पक्ष:
जिला कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक होने के कारण मैं वहां गया हुआ था। इस वजह से शाम की ओपीडी में कौन से डॉक्टर उपस्थित थे और कौन नहीं, इसकी विस्तृत जानकारी मुझे नहीं है। डॉक्टरों से इस संबंध में जवाब तलब किया जाएगा। कई बार डॉक्टरों की ड्यूटी अन्य जगहों पर भी लगाई जाती है।”
डॉ. गुप्ता, बीएमओ, बिल्हा
कार्रवाई की मांग:
यदि बिल्हा अस्पताल की यही स्थिति रही, तो क्षेत्र के गरीब मरीजों को मजबूरन बिलासपुर या अन्य निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा, जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। स्थानीय जनता ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले और कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने वाले इन डॉक्टरों पर तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।



