उमा खरे की रिपोट
बिलासपुर जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली मुख्य सड़क ही बदहाल: 2-3 फीट गहरे गड्ढों में फँस रहे वाहन, 40-50 गाँवों के 10 हज़ार से अधिक लोग रोज़ जोखिम में
19 करोड़ स्वीकृत फिर भी सीपत-कुली-खम्हरिया मार्ग पर भारी वाहनों का तांडव: रोज़ लग रहा 3-4 किमी लंबा जाम; PWD व पर्यावरण नियमों की उड़ रही धज्जियाँ

सीपत। बिलासपुर जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली सीपत-कुली-खम्हरिया मुख्य सड़क वर्तमान में पूरी तरह बदहाली के दौर से गुजर रही है। जिला मुख्यालय तक पहुँचने के इस मुख्य मार्ग पर बने 2 से 3 फीट गहरे जानलेवा गड्ढों, भारी वाहनों से उड़ती धूल और बारिश में निर्मित कीचड़ के कारण 40 से 50 गाँवों की लगभग 10,000 से अधिक आबादी का दैनिक आवागमन पूरी तरह थम सा गया है। मरीज, छात्र, किसान और कर्मचारी प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं।

इस गंभीर जनसमस्या को लेकर युवा शक्ति संगठन के अर्जुन वस्त्रकार की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल—अजय यादव, श्याम सुंदर केंवट, श्रवण वस्त्रकार, महेश्वर नेताम, धर्मेंद्र पटेल, सूरज यादव एवं शशिकांत मेहरा सहित अन्य क्षेत्रवासियों द्वारा बिलासपुर सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू जी को ज्ञापन सौंपकर स्थिति से अवगत कराया गया है।
ज़मीनी समस्या: गड्ढों में फँस रहे वाहन, रोज़ लग रहा 3-4 किमी लंबा जाम
क्षेत्र में संचालित NTPC एवं विभिन्न कोल वाशरियों (हिंद एनर्जी खांडा, गंतौरा व लगरा) से संबद्ध भारी मालवाहक वाहन क्षमता से अधिक लोड लेकर चल रहे हैं। ये गाड़ियाँ बिना तिरपाल के अथवा कट-फटी व आधी-अधूरी पालपरी बाँधकर दौड़ाई जा रही हैं, जिससे रास्ते भर कोयला गिरता है और उड़ती धूल से लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।

सड़क के 2 से 3 फीट गहरे गड्ढों में भारी वाहन रोज़ फँस रहे हैं। वाहनों के टायर फटने, अनियंत्रित होने तथा शाफ्ट व पट्टे टूटने के कारण गाड़ियाँ बीच सड़क पर ही बंद हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप जिला मुख्यालय को जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग पर प्रतिदिन 3 से 4 किलोमीटर लंबा भीषण ट्रैफिक जाम लग रहा है, जिसमें एम्बुलेंस, स्कूली बच्चे और राहगीर घंटों फँसे रहने को मजबूर हैं।
इसके अतिरिक्त, मरम्मत के नाम पर केवल धनिया और खांडा पेट्रोल पंप के सामने सड़क को खुरेदकर छोड़ दिया गया है, जबकि कुली और खम्हरिया जैसे अंतिम सीमावर्ती क्षेत्रों की घोर उपेक्षा की जा रही है, जहाँ स्थिति और भी भयावह है।
क्या कहते हैं नियम और कानूनी प्रावधान?
आपातकालीन रखरखाव की वैधानिक जिम्मेदारी (Motorable Condition Rule): PWD मैनुअल और लोक निर्माण विभाग के मानकों के अनुसार, किसी भी सड़क पर स्थायी निर्माण या टेंडर प्रक्रिया चाहे जिस चरण में हो, सड़क को हर मौसम में आवागमन योग्य (Motorable) बनाए रखना संबंधित निर्माण एजेंसी और ठेकेदार का कानूनी दायित्व है। मानसून के दौरान भी गड्ढों की तुरंत पैचिंग और अस्थायी भराव अनिवार्य है।
मोटर वाहन अधिनियम (MV Act Section 198A): यदि सड़क की खराब स्थिति या रखरखाव में लापरवाही के कारण दुर्घटना होती है, तो संबंधित जिम्मेदार प्राधिकारी व ठेकेदार पर कानूनी कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (1986): व्यावसायिक एवं औद्योगिक परिवहन के दौरान ढके बिना या फटी तिरपाल से सामग्री ले जाना और धूल नियंत्रण (जल-छिड़काव) न करना पर्यावरण व सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा नियमों का सीधा उल्लंघन है।
हमारी स्पष्ट माँग (युवा शक्ति संगठन की आवाज़):
रूट डायवर्जन: सीपत-कुली मार्ग पर NTPC और कोल वाशरियों के भारी मालवाहकों का आवागमन तुरंत प्रतिबंधित कर उन्हें भारतमाला मार्ग पर डायवर्ट किया जाए।
तत्काल गड्ढा-मुक्त सड़क: जिला मुख्यालय जोड़ने वाले इस मार्ग पर कुली-खम्हरिया सहित पूरे हिस्से के जानलेवा गड्ढों को युद्ध स्तर पर भरकर सड़क को तुरंत सुरक्षित आवागमन योग्य बनाया जाए।
नियमों का कड़ाई से पालन: कट-फटी या आधी-अधूरी तिरपाल लगाकर चल रहे ओवरलोडेड वाहनों पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
पारदर्शिता व जाँच: स्वीकृत 19 करोड़ रुपये के बजट के सापेक्ष अब तक हुए कार्यों की पारदर्शी जाँच कराई जाए ताकि कागजी मरम्मत और लीपापोती पर रोक लग सके।
अर्जुन वस्त्रकार (युवा शक्ति संगठन) ने कहा कि 40-50 गाँवों की जनता लंबे समय से इस नरकीय स्थिति को सह रही है। यदि अगले 3 दिनों के भीतर भारी वाहनों का रूट डायवर्ट नहीं किया गया और कुली-खम्हरिया सहित पूरी सड़क की मरम्मत शुरू नहीं हुई, तो समस्त क्षेत्रवासी संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक दायरे में रहकर जनआंदोलन करने तथा उच्च प्रशासनिक व न्यायिक शरण लेने हेतु बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।



