ब्युरो रिपोट हीरा चावराई
शासकीय स्कूल में छात्राओं से कथित छेड़छाड़ का मामला
शिक्षक पर तीन छात्राओं से अशोभनीय व्यवहार और व्हाट्सएप चैट का आरोप, मामले को दबाने के प्रयास के भी लगाए जा रहे आरोप
तिल्दा-नेवरा। ग्राम पंचायत क्षेत्र के एक शासकीय विद्यालय में पदस्थ शिक्षक पर तीन छात्राओं के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ एवं अशोभनीय व्यवहार किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, मामले में शिक्षक द्वारा छात्राओं से कथित तौर पर अश्लील एवं आपत्तिजनक व्हाट्सएप चैट किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि मामला सामने आने के बाद विद्यालय के प्राचार्य द्वारा ग्राम पंचायत के जिम्मेदार लोगों को इसकी जानकारी दी गई। सूत्रों का दावा है कि विद्यालय प्रबंधन, शाला समिति एवं शिक्षक से जुड़े लोगों के बीच बैठक भी हुई, जिसमें मामले को लेकर चर्चा की गई।

15 दिन में तबादले का आश्वासन देने की चर्चा
विशेष सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान संबंधित शिक्षक से कथित रूप से माफीनामा लिखवाने तथा लगभग 15 दिनों के भीतर उसका तबादला कराने की बात कही गई। ग्रामीणों को भी शिक्षक के स्थानांतरण का आश्वासन दिए जाने की जानकारी सामने आ रही है।
ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं तो मामले में तत्काल विभागीय जांच क्यों नहीं कराई गई और केवल तबादले का आश्वासन देकर मामले को समाप्त करने का प्रयास क्यों किया जा रहा है।
12वीं कक्षा की छात्रा होने की जानकारी
सूत्रों के अनुसार, आरोप लगाने वाली छात्राओं में से एक छात्रा 12वीं कक्षा में अध्ययनरत बताई जा रही है। छात्राओं की सुरक्षा और उनकी निजता को देखते हुए उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
मामले को दबाने के आरोप
ग्रामीणों और सूत्रों के बीच यह भी चर्चा है कि पूरे मामले को सार्वजनिक होने से रोकने का प्रयास किया गया। प्राचार्य की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मामले को दबाने या किसी व्यक्ति की संलिप्तता संबंधी आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
छात्राओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले को देखते हुए ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही, यदि व्हाट्सएप चैट अथवा अन्य डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं तो उनकी भी विधिवत जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।














