नक्सल प्रभावित रहे पहाड़ी तरांदुल में पहली बार पहुंची सोनोग्राफी सुविधा
राज्य में पहाड़ी एवं सुदूर अंचल में इस तरह की पहल का अभिनव उदाहरण, कलेक्टर कुन्दन कुमार की पहल से गर्भवती महिलाओं को गांव में ही मिली विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवा
उत्तर बस्तर कांकेर, 04 अक्टूबर 2026/ कभी माओवादी गतिविधियों से प्रभावित और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम तरांदुल में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की नई तस्वीर देखने को मिली। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित सेवा सेतु सह मेगा स्वास्थ्य शिविर में पहली बार इस पहाड़ी एवं सुदूर क्षेत्र में सोनोग्राफी मशीन पहुंचाकर गर्भवती महिलाओं की जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार की अभिनव पहल के तहत आयोजित इस शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाया गया। प्रशासन के अनुसार, राज्य में पहाड़ी एवं इस तरह के सुदूर अंचल में सोनोग्राफी मशीन पहुंचाकर मौके पर जांच की सुविधा उपलब्ध कराने की यह एक महत्वपूर्ण एवं अभिनव पहल है। इससे उन गर्भवती महिलाओं को विशेष राहत मिली, जिन्हें पहले सोनोग्राफी के लिए दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्रों या जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता था।
शिविर में आसपास के विभिन्न गांवों से पहुंची 25 गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी एवं स्वास्थ्य जांच की गई। पहाड़ों और दुर्गम रास्तों के बीच बसे गांव में ही यह सुविधा मिलने से महिलाओं और उनके परिजनों को लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत मिली।
नक्सल गतिविधियों के लंबे दौर के कारण कभी जहां शासकीय सेवाओं की पहुंच एक बड़ी चुनौती थी, वहीं नक्सल उन्मूलन के बाद तरांदुल में पहली बार इतने बड़े स्तर पर स्वास्थ्य शिविर का आयोजन क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों और विकास की नई तस्वीर को सामने लाता है। जहां कभी सुरक्षा और पहुंच सबसे बड़ी चुनौती थी, वहां अब विशेषज्ञ चिकित्सक और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं सीधे ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं।
571 से अधिक लोगों ने कराया स्वास्थ्य परीक्षण
मेगा स्वास्थ्य शिविर में 571 से अधिक लोगों ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया। जरूरतमंदों को नि:शुल्क दवाइयां भी उपलब्ध कराई गईं। शिविर में 76 लोगों का आयुष्मान कार्ड पंजीयन, 162 लोगों की एनसीडी जांच तथा 42 दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए गए। वहीं 90 लोगों का नेत्र परीक्षण किया गया और जांच के बाद 32 लोगों को नि:शुल्क चश्मे प्रदान किए गए।


शिविर में स्त्री रोग, मेडिसिन, हड्डी रोग, शिशु रोग, नाक-कान-गला, मुख रोग और नेत्र रोग सहित विभिन्न विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध रहीं। ग्रामीणों को एक ही स्थान पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श, जांच, दवाइयां और विभिन्न शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला।

दुर्गम क्षेत्र में पहुंची सेवा, ग्रामीणों के लिए बना भरोसे का सेतु
तरांदुल में आयोजित यह शिविर केवल एक स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों तक शासन की पहुंच और जनसेवा के संकल्प का जीवंत उदाहरण बना। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जिला प्रशासन का प्रयास है कि भौगोलिक दूरी, दुर्गमता या अतीत की चुनौतियां किसी भी ग्रामीण के लिए शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा न बनें।
कलेक्टर श्री कुंदन कुमार की इस अभिनव पहल से तरांदुल जैसे सुदूर पहाड़ी क्षेत्र में “सेवा वहीं, जहां जरूरत” की भावना को साकार किया गया। गांव में ही सोनोग्राफी जैसी विशेषज्ञ सुविधा उपलब्ध होना ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच के साथ-साथ क्षेत्र में विकास और विश्वास की मजबूत होती तस्वीर का प्रतीक बना।


